उमरह और उसकी फजीलत का बयान

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Farziyat umrah or uski fazilat ka bayan

फरजीयत उमरह और उसकी फजीलत का बयान

अबू हुरैरा रज़ि. से रिवायत है कि

रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया,

एक उमरह दूसरे उमरह तक के बीच गुनाहों का कफ्फारा होता है

और मकबूले हज का सिला तो सिवाये जन्नत के कुछ नहीं है।

फायदे:

इमाम बुखारी के नजदीक हज कि तरह उमरह भी फर्ज है,

लेकिन मजकूरा हदीस से इसकी फरजीयत वाजेह नहीं होती,

बल्कि वह अहादीस जिनमें इस्लाम के अरकान बयान हुये हैं,

उनमें हज का जिक्र करके उमरह को उनमें बयान नहीं किया गया। वल्लाहु आलम।

(औनुलबारी, 2/59)

(मुख़्तसर सही बुखारी सफ़ा न० 664)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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