नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने किस कद्र उमरह किये?

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Nabi Sallallahu Alaihi wasallam ne kis kadar umrah kiya?

नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने किस कद्र उमरह किये?

इब्ने उमर रज़ि. से रिवायत है,

उनसे पूछा गया कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कितने उमरे किये हैं?

तो उन्होंने जवाब दिया कि चार, जिनमें एक रजब के महीने में किया था,

करने वाला कहता है कि मैंने आइशा रज़ि. से अर्ज किया, अम्मा जान! आपने इब्ने उमर रज़ि. की बात को सुना है?

आइशा रज़ि. ने पूछा वह क्या कहते हैं? सवाल करने वाला बोला वह कहते हैं ?

कि रसलूल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लमम) ने चार उमरे किये, जिनमें एक रजब में किया था।

आइशा रज़ि. ने फरमाया, अल्लाह तआला अबू अब्दुर्रहमान रज़ि. पर रहम करे।

आपने कोई उमराह नहीं किया, जिसमें वह मौजूद न हों।

(फिर वह भूल गये) रजब में तो आपने कोई उमरह भी नहीं अदा फरमाया।

फायदे:

इसमें कोई शक नहीं है कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने रजब के महीने में कोई उमरह नहीं किया।

सही मुस्लिम में है कि हज़रत इब्ने उमर रज़ि. ने हजरत आइशा रज़ि. कि बात सुन कर हाँ या नहीं में कोई जवाब नहीं दिया बल्कि चुप हो गये।

(औनुलबारी, 2/661)

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अनस रज़ि. से रिवायत है, उनसे पूछा गया कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कितने उमरे किये?

तो उन्होंने कहा चार। एक उमरह तो हुदेबिया जो जिलकअदा में किया मुशरकिन ने आपको वापस कर दिया था।

दूसरा उमरह आइन्दा साल जिलकअदा में किया,

जबकि अपने मुशरकिन से सुल्ह फरमायी तीसरा उमरह जिराना जब माले गनीमत तकसीम किया।

मेरा ख्याल है कि यह माले गनीमत हुनेन का था।

(चौथा हज के साथ) फिर मैंने पूछा कि आपने हज कितने किये तो जवाब दिया सिर्फ एक।

अनस रज़ि. से दूसरी रिवायत में यूँ फ़रमाय कि

नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने एक तो वह उमरह किया था जिससे मुशरकिन ने आपको वापस कर दिया था

फिर अगले, साल कजाअ का उमरह, तीसरा जिलकअदा में और चौथा उमरह हज के साथ अदा फरमाया।

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फायदे:

दूसरे उमरह को उमरह कजा इसलिए कहा जाता है कि यह कुरैश से सुलह

और उनसे एक फैसले के नतीजे में हुआ था।

यह नाम इसलिए नहीं रखा गया कि चूँकि मुशरकिन ने पहले उमरह से रोक दिया था तो आपने बतौर कजा अदा किया हो,

जैसा कि आम लोगों में मशहूर है बल्कि जिस उमरह से रोक गया था, उसे शुमार करके चार उमरह होते हैं।

(औनुलबारी, 2/662)

बरा बिन आज़िब रज़ि. से रिवायत है,

उन्होंने फ़रमाय कि सूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हज करने से पहले जिलकअदा में दो उमरे फरमाये।

फायदे:

इस हदीस में दो उमरे बयान हुये हैं। रावी ने वह उमरह जो हज के साथ किया था

और जिस उमरे से आपको रोक दिया गया था, इन दोनों को शुमार नहीं किया गया।

वाजेह हो कि तीन उमरे माहे जिलकअदा में अदा किये गये।

चौथा उमरह हज के साथ और जिलहिज्जा में किया गया था।

(मुख़्तसर सही बुखारी सफ़ा न० 665 )

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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