फरमाने इलाही: तुम कहो कि हम अल्लाह पर और जो किताब हम पर उतारी गई है, उस पर ईमान लाये। “

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FARMAN-E-ILAHI tum kaho ki hum Allah par or jo kitab hum par utari gai hai us par imaan laye
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FARMAN-E-ILAHI tum kaho ki hum Allah par or jo kitab hum par utari gai hai us par imaan laye

फरमाने इलाही: तुम कहो कि हम अल्लाह पर और जो किताब हम पर उतारी गई है, उस पर ईमान लाये। “

अबू हुरैरा रज़ि से रिवायत है,

उन्होंने फरमाया कि यहूदी अहले किताब तौरात को इबरानी जबान में पढ़ा करते

और उसका तर्जुमा मुसलमानों के लिए अरबी जबान में करते तो आपने फरमाया

कि तुम अहले किताब को सच्चा समझो, न झूटा कहो, बल्कि आम तौर पर कहो

“हम अल्लाह पर और जो किताब हम पर नाजिल कि गई है, उस पर ईमान लाये हैं।” आखिर तक।

फायदे: यह हुक्मे नबवी यहूदियों कि ऐसी बातों के मुताल्लिक हैं जिनका सही या गलत हिना मुमकिन हो,

लेकिन जो बातें हमारी शरीयत के मुताबिक हैं, उनकी तसदीक और जो बातें हमारी शरीअत के मुखालिक हैं

उनकी तकजीब करना इस हुक्म में शामिल नहीं।

(मुख्तसर सही बुखारी, सफ़ा न० 1403)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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