जुमा के आदाब ज़्यादा से ज़्यादा नेक काम करना और गुनाहों से बचना.

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जुमा के आदाब

ज़्यादा से ज़्यादा नेक काम करना और गुनाहों से बचना.

(अबू दाऊद)

बा-कसरत दरूद शरीफ पढ़ना.

(अबू दाऊद)

जुमा के दिन फजर की नमाज़ में सूरए अलिफ़-लाम-मीम सजदह और सुरे दहर पढ़ना.

(बुखारी)

सुरे कहफ़ की तिलावत करना.

(हाकिम)

जुमा की नमाज़ के लिए गुसल करना.

(अबू दाऊद)

मिस्वाक करना.

(मुस्लिम)

कपड़ो का कोई जोड़ा ख़ास जुमा के दिन पहनने के लिए रखना.

(अबू दाऊद)

नए कपड़े पहनने की शुरुआत जुमा के दिन करना.

(शामाइल कुबरा)

खुशबू लगाना.

(मुस्लिम)

(मस्जिद) में जल्दी जाना.

(बुखारी)

हो सके तो जुमा की नमाज़ के लिए पैदल जाना.

(तिर्मिज़ी)

इमाम के क़रीब बैठना.

(अबू दाऊद)

पहली सफ में बैठने की कोशिश करना.

(अबू दाऊद)

मस्जिद की तरफ जाने और मस्जिद में दाखिल होने के आदाब का लिहाज़ करना.

लोगों की गर्दनो को फलांगते हुए आगे न जाना.

(अबू दाऊद)

नींद आने पर जगा बदल देना.

(बैहक़ी)

तहय्यतुल मस्जिद पढ़ना.

(तिर्मिज़ी)

किसी को उठाकर कर उसकी जगा खुद न बैठना.

(मुस्लिम)

दो बैठे हुए आदमियों के दरमियान न बैठना

(इब्ने माजा)

गोट लगा कर न बैठना.

(अबू दाऊद)

जुमा की नमाज़ से पहले हलका न लगाना.

(अबू दाऊद)

मिम्बर पर चढ़ने के बाद अज़ान के ख़त्म तक उस पर बैठे रहना.

(अबू दाऊद)

इमाम का खड़े हो कर खुत्बा देना.

(मुस्लिम)

दो ख़ुत्बे देना.

(मुस्लिम)

दो ख़ुत्बों के दरमियान खामोश बैठना.

(अबू दाऊद)

ख़ुत्बे में क़ुरआन करीम पढ़ना.

(मुस्लिम)

ख़ुत्बे में बा-कसरत सुरे क़ाफ़ पढ़ना.

(मुस्लिम)

मुख़्तसर (short) खुत्बा देना.

(मुस्लिम)

इमाम की तरफ मुतवज्जह होना.

(इब्ने माजा)

खामोशी से खुत्बा सुन्ना.

(नसाई)

बिला वजे हरकत न करना, और न कालीन चटाई वगेरा से खेलना.

(तिर्मिज़ी)

हस्बे ज़रुरत बुलंद आवाज़ से खुत्बा देना.

(मुस्लिम)

जुमा की नमाज़ में मस्नून किरात का इहतिमाम करना.

(मुस्लिम)

नमाज़ को ख़ुत्बे से तवील ( यानी लम्बी) करना.

(मुस्लिम)

जुमा की नमाज़ के बाद सुनन व नवाफिल के लिए जगा बदलना.

(अबू दाऊद)

जुमा की अदायगी में ला-परवाही न करना.

(अबू दावूद)

जुमा के दिन मक़बूलियते दुआ की घरी की जुस्तुजू में रहना.

(तिर्मिज़ी)

नमाज़ के बाद रोज़ी की तलाश में निकलना.

(सौराह ऐ जुमा)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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