आपस में इख़्तेलाफ़ का अंजाम–उम्मते मुस्लिम के लिए अहम पैगाम

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Aapas Me Ikhtelaf Ka Anjaam – Ummate Muslima Ke Liye Aham Paigaam
Aapas Me Ikhtelaf Ka Anjaam
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Aapas Me Ikhtelaf Ka Anjaam – Ummate Muslima Ke Liye Aham Paigaam

आपस में इख़्तेलाफ़ का अंजाम–उम्मते मुस्लिम के लिए अहम पैगाम

मफ़हूम-ए-हदीस: अबू सोबन (रज़ि’अल्लाहु अन्हु) से रिवायत है के,

रसूल’अल्लाह (सलल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया, बेशक मैंने अपने रब से सवाल किया के:-

“ए मेरे रब! मेरी उम्मत को कहतसाली से हलक़ न करना,

इन पर कोई गैर मुस्लिम दुश्मन मुसल्लत न हो जो इनकी मर्कज़ीयत को बिलकुल नेस्तो-नाबूद कर दे।

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने फ़रमाया: “ए नबी (सलल्लाहु अलैहि वसल्लम) मेरे फैसलों में कोई रद्दो-बदल नहीं हो सकता!

लेकिन मैंने आपकी उम्मत के हक़ में ये दुआ कबूल कर ली है,

के इन्हे कहतसाली से हलक़ नहीं करूँगा, और ना इन पर कोई गैर मुस्लिम दुश्मन को मुसल्लत करूँगा

जो इनकी जड़े उखड फेंके जब तक के आपकी उम्मत खुद आपस में क़त्लो गारा तना करे और एक दूसरे को कैदी तक बना ले”।

(सही मुस्लिम, किताब उल फ़ितन 2889)

सुब्हान’अल्लाह आज हमे गौर करना चाहिए के, जिन हालात से हम गुजर रहे है उसकी अहम् वजह क्या है।

जब हम इस सवाल पर गौर करेंगे तब हमे बस एक ही जवाब मिलेगा, और वो है,

दीन से दूरी और उसकी वजह से मुसलमानो के दरमियान आपसी इन्तेशार. जब की अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने क़ुरआने हाकिम की आयतो में इस उम्मत को एक अहम नसीहत करते हुए फ़रमाया:

अल-क़ुरआन: “ए वो लोगों जो ईमान लाये हो!

इताअत करो अल्लाह की और इताअत करो उसके रसूल की

और आपस में इख़्तेलाफ़ पैदा न करना!

अगर तुम ऐसा करोगे, तो तुम बुज़दिल बना दिए जाओगे,

और तुम्हारा इक़बाल जाता रहेगा, और सब्र से काम लो

के अल्लाह सब्र करने वालो क साथ है”

(सौराह (8) आयात 46)

तो बहरहाल अगर हम चाहते है के दुनिया और आख़िरत की रुस्वाई से बचे

तो हमे चाहिए के अल्लाह और उसके रसूल की इताअत को मजबूती से थाम ले,

हर किस्म की बिददत और खुराफात से बचे, गैरशरायी अमल से एहतियात करे,.

और हम आपस में एक-दूसरे से लड़ने से बाज़ आजाये,

मसलको और फ़िरक़ों की चिंगारी को जहालत में ऐसी हवा न दे की,

उससे भड़की आग में कोई और अपनी रोटियां सेंक जाये

इसी बात के ज़ीमन में एक आलिम हम सबको नसीहत करते हुए कहते है के

न समझोगे तो मिट्ट जाओगे

ए इस दौर के मुसलमानो!

तुम्हारी दास्ताँ भी न रहेगी

दस्तानो में…

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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