दाढ़ी रखने का हुक्म क़ुरआन ओ हदीस की रौशनी में

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Darhi Rakhne ka Hukm Quraano Hadees ki Roshni me

दाढ़ी रखने का हुक्म क़ुरआन ओ हदीस की रौशनी में

क्या दाढ़ी रखना ज़रूरी है?

आईये जानते है दाढ़ी रखने का हुक्म क्या है शरीयत में

हमारे मुआशरे में अक्सर
लोग दाढ़ी रखना गैर ज़रूरी समझते हैं
जबकि हकीकत ये है की दाढ़ी रखना सिर्फ सुन्नत ही नहीं
बल्कि इसको वाजिब कहा गया है
इसके बारेमे अल्लाह के रसूल صلى الله عليه وسلم ने इसका खास हुक्म दिया है

हदीस: (1)

मुशरिकों की मुखालिफत करो
दाढ़ी को बढ़ाओ और मूंछो को छोटा करो

(बुखारी शरीफ 5892, 5893)

हदीस: (2)

हज़रात अब्दुल्लाह बिन उम्र (रज़िअल्लाहु तआला अन्हु) फरमाते हैं की
रसूलुल्लाह صلى الله عليه وسلم ने मूंछो को छोटा करने
और दाढ़ी को बढ़ाने का हुक्म दिया है

(अबू दौड़ 4199, मुस्लिम शरीफ 259, तिर्मिज़ी शरीफ 2764)

क़ुरआन का हुक्म रसूलुल्लाह صلى الله عليه وسلم की इताअत करने के लिए
अल्लाह तआला क़ुरआन में इरशाद फरमाता है

क़ुरआन:

और जो कुछ रसूल صلى الله عليه وسلم
तुम्हे दे वो ले लो और जिस बात से मना फरमायें
उससे रुक जाओ और अल्लाह से डरो बेशक अल्लाह सख्त अज़ाब देने वाला है

(सौराह हश्र 59 अयाह न०.7)

इस आयात पर अगर गौर किया जाए तो हमें पता चलता हे कि

अल्लाह के रसूल صلى الله عليه وسلم के हुक्मो को मन्ना असल में अल्लाह के हुक्म को मन्ना हे,
और अल्लाह के हुक्म को मन्ना और उसपर अमल करना हर इन्सान पर फ़र्ज़ है

और एक जगह अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इरशाद फरमाता है
مَنۡ یُّطِعِ الرَّسُوۡلَ فَقَدۡ اَطَاعَ اللّٰہ

जिसने रसूल صلى الله عليه وسلم की फरमाबरदारी की उसने मेरी यानी अल्लाह की फरमाबरदारी की

(सौराह निसा 4 अयाह न०. 90)

यानी जिसने रसूल صلى الله عليه وسلم के हुक्म को माना उसने अल्लाह के हुक्म को माना

अब चूँकि दाढ़ी बढ़ने का हुक्म अल्लाह के रसूल صلى الله عليه وسلم ने फ़रमाया है इसलिए
दाढ़ी रखने में न सिर्फ रसूल صلى الله عليه وسلم की फरमाबरदारी है बल्कि अल्लाह की फरमाबरदारी है
दाढ़ी रखने में न सिर्फ हदीस पर अमल करना हुआ
बल्कि क़ुरआने पाक पर भी अमल करना हुआ
अब इतना जान लेने के बाद भी जो कोई
अल्लाह के रसूल صلى الله عليه وسلم के फरमान की मुखालिफत करे

उनका कहना न माने

या अपनी अकाल से अपनी राये को मुआशरे को
या दुनिआ वालो को आपके हुक्म से ज़्यादा तरजीह दे
तो ऐसे लोगो को अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से डरते रहना चाहिए की कहीं
कोई अज़ाब उनपर न आ जाए

क्यूंकि अल्लाह तआला ने इरशाद फ़रमाया

” जो लोग रसूल صلى الله عليه وسلم के हुक्म की मुखालिफत करते हैं
उन्हें डरना चाहिए की कहीं उनपर कोई जबर्दश्त आफत न आ पढ़े
या उन्हें दर्दनाक अज़ाब न पहुंचे

(सूरह नूर 24, अयाह न०.63)

अल्लाह तआला ने इन्सान को जोड़े जोड़े पैदा किया है

और मर्द औरत में ज़ाहिरी तमीज करने के लिए
मर्द को दाढ़ी जैसा अनमोल खूबशूरत तोहफा दिया
दाढ़ी मर्द की ज़ीनत है दाढ़ी खसेले फितरत मे से है

तमाम अम्बिया ए किराम की सुन्नत है

कोई नबी ऐसे नहीं गुज़रे जिन्होंने अपनी दाढ़ी को कटाया हो
यही वजह है की शरीअते इस्लामिआ ने मुसलमानो को दाढ़ी बढ़ने का हुक्म दिया
अल्लाह तआला की इस अता करदा इस फितरत को
बदलना अपने आपको औरतों के मुशाबेह करना
अल्लाह तआला की तख़लीक़ में तबदीली करना है
जो एक बोहत बड़ा गुनाह है

दाढ़ी रखना वाजिब है और इसको कटना एक हराम अमल है

जो अल्लाह और उसके रसूल صلى الله عليه وسلم की नाराज़गी का बैश है

कुछ लोग छोटा सा खत रख लेते हैं

ये पूरी दाढ़ी नहीं दाढ़ी की लम्बाई शरीअत और अहादीस की रौशनी से साबित है
की दाढ़ी की लम्बाई एक मुठ्ठी के बराबर हो
यानी थोड़ी से मिलकर मुठ पकड़े फिर एक मुठ से जितनी ज़्यादा हो उसको काट सकते है
यही अमल सहाबा ए किराम का था और हज़रात अली भी ऐसा ही किया करते थे

कुछ मुस्लमान दाढ़ी रखने से इसलिए डरते हैं

की कोई लड़की पसंद नहीं करेगी और उनके लिए रिश्ते नहीं आएंगे
यह जान लो कि रिश्ते अल्लाह ने इन्सान के पैदा होने से पहले ही बना दिए हैं
की कौन कब मरेगा किसकी शादी किस्से होगी
किसके कितनी औलादे पैदा होंगी और
कितने लड़के और कितनी लड़कियां होंगी
ये सब पहले से ही तय है
और वो लड़की जो आपकी दाढ़ी से नफरत करें वो किस काम की जो
आपको जन्नत के रस्ते पर देखकर मुंह मोड़े
और ऐसे रिश्ते किस काम के जो आपको शरीयत पर चलते हुए पसंद न करे
ये अल्लाह की तरफ से आज़माइश है की

बाँदा ऐसे हालात में क्या करे

क्या वो अल्लाह को नाराज़ करता है
और लोगो को खुश करता है
या अल्लाह को राज़ी करके वो
नबी صلى الله عليه وسلم के हुक्म पर अमल करता है
और जो औरत हमें शरीअत के साथ पसंद करेगी
वो आगे भी औलाद की तरबियत में भी हमारा साथ देगी
और ऐसे घर भी अल्लाह की रहमतों का नुज़ूल होगा
अगर हमारी इस्लामी बहने चाहे तो हर मुस्लमान के चेहरे पर दाढ़ी होगी
वो ऐसे की अगर कोई रिश्ता ए तो वो पहले ही
यह कहदें की में अगर शादी करूंगी तो उस शख्स से करूंगी
जिसके चेहरे पर मेरे नबी صلى الله عليه وسلم की सुन्नत यानी दाढ़ी शरीफ होगी
फिर देखो क्या होता है
सबने ये अहद करलिया तो हर चेहरे पर दाढ़ी नज़र आएगी
अल्लाह हमें अमल की तौफ़ीक़ अता फरमाए आमीन

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2 COMMENTS

  1. Assalamualaikum
    Masha’Allah for the nice explanation.
    Dadhi ek musht honi hi chahiye aisi koi waajeh Hadees aap pesh kar sakte ho janab?
    Me aapki mukhalifat nahi kar raha par apni islaah ke liye hawala chahta hu. Jajakallahu Khairan Kaseera

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