एक सवाल की मुख्तलिफ शक्लें

0
43
AIK SAWAAL KI MUKHTALIF SHAKLAIN
Allah
Islamic Palace App

AIK SAWAAL KI MUKHTALIF SHAKLAIN

एक सवाल की मुख्तलिफ शक्लें

और नसीहत तो वही क़ुबूल करते हैं जो अक़ल इस्तेमाल करते हैं.”

(अल-क़ुरआन 2:269, 3:7)

अक्सर मज़हबी हलकों में यह सवाल के आया “अल्लाह के सिवा कोई मुश्किल हल कर सकता है या सिर्फ अल्लाह ही इस पर क़ादिर है”

आया, मगर फ़रीक़ैन मे से कोई भी कैल नहीं हो पाता. एक ज़ी-शऊर इंसान के ज़ेहन मे यह सवाल उभरता है

तो वो इसको मुख्तलिफ पहलुओं से जंचता है के किस तरह खुदा के

सिवा कोई हस्ती मुश्किल कुशाई कर सकती है. इस सवाल की कई मुख्तलिफ सूरतें हैं:

एक शख्स को किसी मुश्किल का सामना है, वो चाहता है

के मेरी मुश्किल दूर हो, वो अल्लाह के सिवा किसी दूसरी हस्ती को पुकारना चाहता है

जो इसकी मुश्किल को हल करे या अल्लाह से हल करवाए. अब

·अगर अल्लाह के सिवा कोई हस्ती (नबी, सहाबी, वाली, बुज़ुर्ग वग़ैरा) उसकी मुश्किल हाल कर सकती है

तो किया साइल (मांगने वाले) और मुश्किल कुशा के दरमिआन लाखों मील की दूरी पर वो ज़िन्दगी मैं या ज़िन्दगी के बाद कब्र मैं आवाज़ सुन सकता है?

· बिल-फ़र्ज़ वो आवाज़ सुनले तो फिर ये सवाल उभरता है के वो दुनिया की हर ज़बान से वाक़िफ़ है या नहीं?

मसलन जर्मन जर्मनी मे, अमेरिकन इंग्लिश मे और फ्रेंच फ्रेंच मे अपनी मुश्किल पेश करेगा

·अगर ये भी फ़र्ज़ केर लिए जाए के वो आदम (अलैहि सलाम) से ले कर आज तक जितनी ज़बानें बानी और बन के बिगड़ गईं तमाम से वाक़िफ़ है

तो फिर सवाल ये है के एक लम्हे मे पूरी दुनिया से हज़ारों या लाखों लोग अपनी मुश्किलात इस के सामने पेश करेंगे,

तो किया वो इन सुब की मुश्किलात एक साथ ही सुन और समझ लेगा या इस के लिए क़तर लगाने या टोकन लेने की ज़रुरत पेश आएगी?

· अल्लाह अपने बंदे की हर दुआ ओस के माज़ी-और-मुस्तक़बिल के हालात मद्दे नज़र रख कर पूरा फरमाता है

के कहीं वो चीज़ बंदे की दुनिया-और-आखरत के लिए नुक़सानदेह नहो, क्यू के इन्सान खुद भी नहीं जनता के जो चीज़ वो मांग रहा है

उसमे ओस के लिए नफा है या नुकसान. किया वो हस्ती जिसे अल्लाह के शिव पुकारा जा रहा है

दुनिया के तमाम उन गिनत लोगों के किरदार, नियत और माज़ी, हाल और मुस्तक़बिल से बा-खबर है

के जो कोई ओस से सवाल करे उसका ठीक वैसा ही या ओस से अच्छा काम बन जाए?

· किया ओस हस्ती को कभी नींद या आराम की भी ज़रूरत है या वो हमेशा चौकन्ना रहता है,

अगर नहीं तो फिर हमारे पास एक लिस्ट होनी चाहिए के कब वो जागृहा है और कब नहीं ता के मुश्किल को सुने और समझे?

· एक शख्स बोलने से क़ासिर है इसका गला बंद हो चूका है,

अगर वो दिल है दिल मे अपनी मुश्किल पेश करे तो किया वो उसकी दिली फर्याद भी सुन लेगा?

· इंसान को पैदाइश से मौत तक छोटी बरी तमाम मुश्किलात का सामना रहता है,

अगर वो तमाम मुश्किलात अल्लाह तआला हाल करने पर क़ादिर है

तो ग़ैर अल्लाह की तरफ रुजू’ करने की किया ज़रुरत है?

और अगर ग़ैर अल्लाह तमाम मुश्किलात को हाल कर सकते हैं

तो फिर अल्लाह की किया हाजत है?

· अगर ग़ैर अल्लाह तमाम मुश्किलात हाल करने पाय क़ादिर नहीं; हो सकता है

के कुछ मुश्किलात का बेरा अल्लाह ने उठाया हो और कुछ हाल करने के इख्त्यारात किसी और को दे रखे हों,

ऐसी सूरत मे तो हमारे पास एक ऐसी फेहरिस्त होनी चाहिए के कोनसी मुश्किल खुदा हाल करने पे क़ादिर है

और कोनसी ग़ैर हाल कर सकता है ता के साइल अपनी मुश्किल ओसिक ए सामने पेश करे जो हाल करने पे क़ादिर हो?

· किया खुदा के शिव जो हस्ती मुश्किल हाल कर सकती है

ज़ाहिर है वो मुश्किल डाल भी सकती है, या इसकी ड्यूटी सिर्फ हाल करने पे है?

अगर वो मुश्किल हाल कर सकती है तो फिर डालने वाला कौन है?

· बिल-आखिर नतीजा ये निकलेगा के खुदा मुश्किलात डालने वाला है

और ग़ैर अल्लाह मुश्किल हाल करने वाला है, बिलफार्ज एक हस्ती डालने पैर मुसिर हो और दूसरी हाल करने पर तो दोनों मेसे कोनसी हस्ती अपना फैसला वापस लेगी?

· कहते हैं जिस तरह नौकरी या मुलाज़मत हासिल करने या सरकारी दफ्तर मैं कोई काम निकलवाने के लिए किसी रिफरेन्स की ज़रुरत होती है,

अगर किसी बारे आदमी या जान पहचान वाले की पर्ची हो तो नौकरी पक्की इसी तरह अल्लाह से दुआ मांगते वक़्त ओस के किसी मेहबूब का वसीला या रिफरेन्स हो तो दुआ क़ुबूल होगी, लेकिन,

रिफरेन्स या पर्ची की ज़रुरत इन वजूहात की बिना पर होती है,

· नौकरी देने वाला शख्स न-वाक़िफ़ होता है

के जिसे वो नौकरी देने वाला है, वो भरोसे के लाइक है या नहीं, यानी कहीं वो नौकरी का न-जाइज़ फ़ायदा तो नहीं उठाएगा?

· या फिर मेद्वार ज़्यादा और असामिआं (vacancies) बहुत कम् होती हैं.

· या फिर ऑन ऑफिसर्स के पास इतना टाइम नहीं होता, इस वजा से वो सिर्फ पर्ची वालों के काम करते हैं.

· या फिर सिरकारी कर्मचारी खुद हराम होते हैं.

· या फिर उन्हें लोगों की मुश्किल का एहसास नहीं होता यानी बे हिसस होते हैं.

अब,
एक (government officer) की तरह किया अल्लाह (सुनहानहु वाताला) अपने बन्दों से न-वाक़िफ़ है के उसे रिफरेन्स की ज़रुरत परे? किया वो दिलों के हाल से वाक़िफ़ नहीं?

किया एक अफसर की तरह अल्लाह तआला सुब की मुरादें पूरी करने से क़ासिर है? जिस तरह एक (employer) के पास लिमिटेड सीट्स होती हैं,

किया अल्लाह के ख़ज़ानों मै कुछ कमी है? किया एक अफसर की तरह अल्लाह तआला के पास इतना टाइम नहीं है

के वो एक वक़्त मैं सुब की हाजतें पूरी कर दे? किया वो टाइम का मोहताज है?

किया अल्लाह तआला (नौज़बिल्लाह!) क्या हमारे लिए अल्लाह तआला के यह फरमान काफी नहीं?

“ऐ लोगो! एक मिसाल बयान की जा रही है, ज़रा कान लगा कर सुनलो! अल्लाह के सिवा जिन जिन को तुम पुकारते हो वो एक मक्खी भी तो पैदा नहीं कर सकते,

जो सराय के सराय ही जमा’ हो जाएं, बुल के अगर मक्खी इन से कोई चीज़ ले भगय तो यह तो इसे भी इस से छीन नहीं सकते,

बरा कमज़ोर है तालाब करने वाला और बरा ही कमज़ोर है वो जिस से तालाब किया जा रहा है.

लोगों ने तो अल्लाह के मर्तबे के मुताबिक़ उसकी क़द्र जानी ही नहीं, अल्लाह तआला बरा ही ज़ोर-और-क़ूवत वाला और ग़ालिब-और-ज़बरदस्त है.”

(अल-क़ुरआन सौराह हज 22:73)

Follow Us

हमारा फेसबुक पेज लाइक करने के लिए यहाँ क्लिक करें…

अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

ISLAMIC PALACE को लाइक करने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया। जिन्होंने लाइक नहीं किया तो वह इसी तरह की दीन और इस्लाम से जुड़ी हर अहम बातों से रूबरू होने के लिए हमारे इस पेज Islamic Palace  को ज़रूर लाइक करें, और ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को शेयर के ज़रिये पहुंचाए। शुक्रिया

LEAVE A REPLY