वुज़ू के बाद की दुआएं

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EMTEHAN MEIN KAMYABE KE LIYE DUA
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DUA Wuzu Ke Ba’ad Ki Duae’n

वुज़ू के बाद की दुआएं

रसूल’अल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया जो शख्स पूरा वुज़ू करे और फिर कहे:

أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إلَّا اللهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّداً عَبْدُهُ وَرَسُولُه

“अस-हदुअन लाइलाहा “इल्लल्लाहु वह्दहू ला शारिका लहू व “ऐश-हादु “अन्ना

मुहम्मदन ‘अब्दुहु व रसूलुहु.मैं गवाही देता हूँ के अल्लाह के सिवा कोई माबूद बरहक़ नहीं. वो अकेला है.

इसका कोई शरीक नहीं और मैं गवाही देता हूँ के मुहम्मद (ﷺ) अल्लाह के बन्दे और रसूल हैं.’

तो इस के लिए जन्नत के आठों दरवाज़े खोल दिए जाते हैं के जिस से चाहे दाखिल हो.

(मुस्लिम: अल तहारा 234)

अबू दावूद (अल तहारा 170) की एक रिवायत में इस दुआ को आसमान की तरफ नज़र उठा कर पढ़ने का ज़िकर है

मगर ये रिवायत सहीह नहीं. इस में अबू अक़ील के चाचा ज़ाद भाई मजहूल है._

वुज़ू के बाद ये दुआ पढ़ें

1. اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي مِنَ التَّوَّابِينَ وَاجْعَلْنِي مِنَ الْمُتَطَهِّرِين*

(अल्लाहुम्मज ‘अलनी मिनत-तव्वाबीन वजलनि मीनल-मुताहिरीन)

ये अल्लाह! मुझे बहुत तौबा करने वालों में से बना दे और मुझे पाक साफ़ रहने वालों में से बना दे

2. سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ، أَسْتَغْفِرُكَ وَأَتُوبُ إِلَيْك*

(सुब्हानका अल्लाहुम्मा व बिहंदीका, “अस-हदुअन ला “इलाहा “इल्ला”अंता, ‘अस्तग़फ़िरक़ा व ‘अतूबु ‘इलायक.)

ए अल्लाह! तू अपनी तमाम तर तारीफ़ात के साथ (हर ऐब से) पाक है, मैं गवाही देता हूँ के तेरे सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं है,

मैं तुझ से बक़शिश मांगता हूँ और तेरे हुज़ूर तौबा करता हूँ,

(नसाई आमाल अल यौम व लाइला 1)

इसे इमाम हाकिम, हाफ़िज़ ज़हबी और इब्ने हजार ने सहीह कहा है.

(किसी मजलिस के खात्मे पर भी एहि दुआ पढ़ी जाती है)

वुज़ू की मनघडत दुआयें:

रसूल’ अल्लाह (ﷺ) की सुन्नत से वुज़ू के शुरू में (बिस्मिल्लाह) और बाद में शादतें का पढ़ना साबित है.

लेकिन बाज़ लोग वुज़ू में हर अजु धोते वक़्त एक-एक दुआ पढ़ते हैं और वो दुआएं मारवज्जा क़ुतुब-ए-नमाज़ में

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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