हज़रते सुलेमान अलैहिस सलाम के घोड़े

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Hazrate Suleman Alaihis Salam Ke Ghode
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Hazrate Suleman Alaihis Salam Ke Ghode

हज़रते सुलेमान अलैहिस सलाम के घोड़े

एक मर्तबा जिहाद की एक मुहीम के मोखा पर शाम के वाक्हत हज़रते सुलेमान अलैहिस सलाम ने घोड़ों को अस्तबल से लेन का हुकुम दिया.

जब वो पेश किये गए तो चूँकि आप को घोड़ों की नस्लों और इन के जाती अवसाफ के इल्म का कमल हासिल था

इस सब लिए जब आप ने इन घोड़ों को असील सबक़ रु और खुश रु पाया और ये मुलाहज़ा फ़रमाया की इन की तादाद बहुत ज़ियादा है

तो आप पर मसर्रत व अम्बिस्टार की कैफियत तरी हो गयी और आप फरमाने लगे की इन घोड़ों से मेरी सहब्बत ऐसी माली महब्बत में शामिल है

जो परवर डगर के ज़िक्र ही का एक शोबा है. हज़रते सुलेमान अलैहिस सलाम के इस घोड़ो फ़िक्र के दरमियान घोड़े अस्तबल को रवाना हो गया.

चुनांचे, जब आप ने नज़र उठायी तो वो घोड़े निगाह से ऑइल हो गए थे तो आप ने हुकुम दिया की उन घोड़ों को वापस लाओ.

जब वो घोड़े वापस लाये गए तो हज़रते सुलेमान अलैहिस सलाम ने जोशी महब्बत में उन घोड़ों की पिंडलियों और दर्दनो पर हाथ फेरना और थप थापना शुरू कर दिया.

कुंकि ये घोड़े जिहाद का सामान थे इस लिए आप इन की इज़्ज़त व तोखिर करते हुवे एक माहिर फैन की तरह से इन घोड़ों को मानुस करने लगे और इज़हारे मोहब्बत फरमाने लगे.

क़ुरान ए मजीद ने इस वखिये को हस्बे जाईल इबरत में बयान फ़रमाया है.

तर्ज़ुमा ए कंज़ुल ईमान:

और हम ने दावूद को सुलेमान आता फ़रमाया कई अच्छा बाँदा बेशक वो बहुत रुजूअ लेन वाला जब की उस पर पेश किये गया तीसरे पहर को की रु किये तो तीन पाऊँ पर खड़े हो चौथे शूम का कनारा ज़मीन पर लगाए

हुवे और चलाइये तो हवा हो जाएँ तो सुलेमान ने कहा मुझे इन घोड़ों की महब्बत पसंद आयी है

अपने रब की याद के लिए फिर उन्हें चलने का हुकुम दिया यहाँ तक की निगाह से पर दे में छुप गए फिर हुकुम दिया की उन्हें मेरे पास वापस लाओ तो इन की पिंडलियों और गर्दनो पर हाथ फेरने लगा

दर से हिदायत

इन आयात की जो तफ़्सीर हम ने तहरीर की है इस को इब्ने जरीर तबरी और इमाम राज़ी ने तरजीह दी है और हज़रते अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु तआला अन्हा ने भी यही तफ़्सीर फ़रमाई है.

जिस के नखल अली बिन अभी तल्हा हैं इन आयात की तफ़्सीर में बाज़ मुफ़स्सिरीन ने  घोड़ों की पिंडलियाँ और घोड़ों की गर्दनो को तलवार से काट डालना तहरीर किया है

और इसी खिसँ के बाज़ दूसरे कमज़ोर अक़वाल भी तहरीर किये हैं जिन की सिहत पर कोई दलील नहीं है

और वो महज़ हिकायत और दस्ताने है जो दलाईले कवियया के सामने किसी तरह खाबिले खाबुल नहीं और ये तफ़्सीर जो हम ने तहरीर की है इस पर न कोई अश्कल व एतिराज़ पड़ता है न किसी तवील की ज़रूरत पेश आती है.

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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