पेश लफ्ज़

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ख़्वाब की ताबीर

लेखकः अल्लामा मजलिसी

तरजुमाः अमान अली ज़ैदी

Pesh Lafz

पेश लफ्ज़

काफ़ी अर्से से ये खयाल था कि कोई ऐसी किताब लिखी जो ख़्वाबों कि सहीह ताबीर पर मुश्तिमल हो 1 नीज़ मोमिनीन कराम का इसरार भी नाक़ाबिले बरदाश्त था

क्योकि उर्दु ज़बान मे कोई ऐसा मोतबर ख़्वाब नामा मौजूद नही था जो मोमिनीन कि इस़ रोज़मररा- की अहम ज़रूरत को पूरा कर सकता

1 लेहाजा ज़ेरे नज़र किताब ताबीरूरोया कि तरतीबो तदवीन को पुख्ता तालीफिया जो मौलाना नज़र हुसैन साहब ज़फऱ मौलाना जव्वाद उल हुसैन हमदानी मौलाना सैय्यद इकरार हुसैन साहब और मौलाना गुलाम हैदर साहब पर

मुश्तमिल है के सुपुर्द कर दिया गया 1 जिन्होने बडी काविश और ज़ाफिशानी से इस ख्वाब नामे को मुरत्तब किया और इस सिलसिले मे मुख्तलिफ कुतुब व तफासीर खूसूसन आयतुल्लाहुल् उज़म मौहिदिदसे आज़म जनाब मौ. बाक़िर

साहब कददसल्लाहो की माया नाज़ किताब बिहारूल अननार को पेशे नज़र रखा और उसके अलावा दीगर मशहुरो म्रारूफ कुतुब से इस्तिफादा किया बख़्ता तालीफिया ने अपने तई इन्तिहाई कोशिश की कि कोई ऐसा मवाद इस किताब मे

गैर मौजूद हो लेकिन ज़मानए हाल मे शाया किया जा रहा है उम्मीद है कि हिन्दी जानने वाले इस्तेफादा करेगे।

बिस्मिल्ला हिर्रहमानिर्रहीम.

अक़्सामे ख़्वाब. ख़्वाब की चार क़िस्में होती हैं।

1. वो ख़्वाब जो अल्लाह तआला की तरफ से हो और उसकी तावील व तबीर होती है।

2. वो ख़्वाब जो वसावसे शैतान से हो।

3. वो ख़्वाब जो ग़ल्बऐ अग़लात यानी सफ़रा ,सौदा , बल्ग़म या

खून में से किसी एक की ज़्यादती की वजह से हो मसलन जिस शख़्स को सौदा का ग़ल्बा हो उसे उमूमम ख़वाब मे स्यिह रंग की ख़ौफनाक चीज़े नज़र आती हैं।

4. वो ख़्वाब जो अफकारो तफक्कुरात की वजह से हो।पहले ख़्वाब के अलावा

दीगर ख़्वाब परेशान और मुख़्तलित और मुतलब्बिस बे हकीकत होते हैं(सफीनतुल बिहार)

वैसे मशहूर है कि ख़्वाब वो है जो सुबहे सादिक़ से पहले रोज़ा रखने के वक़्त आये सच्चा ख़वाब वो है जो दिन में आये।

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