अय्यामे हैज़ की क़ज़ा

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Ayyame Haiz Ki Qaza
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Ayyame Haiz Ki Qaza

सवालात ए रमजान

पोस्ट न० 27

अय्यामे हैज़ की क़ज़ा

हज़रात आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा से दरयाफ्त किया के

ये क्या बात है के अय्यामे हैज़ में जो रोज़े क़ज़ा होते हैं उनकी क़ज़ा की जाती है और जो नमाज़े क़ज़ा होती हैं उनकी क़ज़ा नहीं पढ़ी जाती…

उम्मुल मोमिनीन हज़रात आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने फ़रमाया के

रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम) के ज़माने में जब हम इसमें (हैज़ में) मुब्तिला होते थे तो हमको उन दिनों में

क़ज़ा शुदा रोज़े रखने का हुक्म दिया जाता था और क़ज़ा नमाज़ पढ़ने का हुक्म नहीं दिया जाता,

(सहीह मुस्लिम,)

(फ़िक्हुल इबादात, 331)

 

अगर खजूर न पाए तो फिर पानी ही से अफ्तार करे, इसलिए के अल्लाह ताला ने पानी को तहूर (पाक) बनाया है,

(फ़िक्हुल इबादात, 334)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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