कुछ लोग सोचते है के रोज़ा रख कर गुनाह करने से अच्छा हम रोज़ा ही ना रखे उनके बारे में क्या हुक्म है?

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Kuch Log Sochte Hai Ke Roza Rakh Kar Gunah Karne
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Kuch Log Sochte Hai Ke Roza Rakh Kar Gunah Karne Se Acha Hum Roza Hee Naa Rakhe Unke Baare Me Kya Hukm Hai

सवालात ए रमजान

पोस्ट 25

कुछ लोग सोचते है के रोज़ा रख कर गुनाह करने से अच्छा हम रोज़ा ही ना रखे उनके बारे में क्या हुक्म है?

ये बात हिकमते शरई के खिलाफ हैi,

शरीयत रोज़ा रखने वालो से ये मुतालबा करती है के वो अपने रोज़े की हिफाज़त करे,

और जब अल्लाह की रज़ा के लिए खाना पीना छोर दिया है तो वो लज़्ज़ते गुनाहो से भी दूर रहे, और अपने रोज़े के सवाब को जाय न करे,

मगर शरीयत ने ये नहीं कहा के जो लोग गुनाहो के मुर्तकिब (करने वाले) होते है वो रोज़ा ही न रखे,

हुज़ूर अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने रोज़ेदार को परहेज़ की बहुत ही ताकीद फ़रमाई है,

एक हदीस पाक में है के,

बहुत से रात में क़याम करने वाले ऐसे हैं जिनको रात जागने के सिवा कुछ नहीं मिलता,

और बहुत से रोज़ादार ऐसे हैं जिनको भूख प्यास के सिवा कुछ नहीं मिलता,”

एक और हदीस पाक में है के,

जो शख्स झूट बोले और गलत काम करने से बाज़ नहीं आता,

अल्लाह तआला को उसका खाना पीना छुड़ाने की कोई ज़रूरत नहीं,”

(आपके मास्किल और उनका हाल, 3/333)

लेकिन इस का मक़सद ये नहीं के लोग गुनाह करने आदि होने की वजह से रोज़ा ही न रखे ये तो भहुत बड़ी बेवकूफी है)

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