रमजान के आखिरी जुमा से जुड़ी गुमराह करने वाली एक गलत हदीस

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Ramzan Ke Aakhiri Juma se judi Gumrah Karne Wali Ek Galat Hadees
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Ramzan Ke Aakhiri Juma se judi Gumrah Karne Wali Ek Galat Hadees

रमज़ान के आखरी जुमा के बारे में एक गलत हदीस की तरदीद

पिछले कुछ सालो से जैसे ही रमज़ान का आखरी जमुआह आता है सोशल मीडिया में एक गलत और जूठी हदीस बड़ी तेज़ी से चल पड़ती है जिस का खुलासा है की

“जिस आदमी की ज़िन्दगी में बहुत सी नमाज़े क़ज़ा हुयी हो और उसे उसकी तादाद भी न मालुम हो तो अगर वो रमज़ान के आखरी जमुआह को 4 रकत क़ज़ा ए उमरी की निय्यत से पढ़ ले और उसमे ये सौराह इतनी बार और ये सूरत इतनी बार पढ़े तो पिछली क़ज़ा नमाज़ो का कफ़्फ़ाराह हो जायेगा ….”

अव्वल तो यह बात मसाइल के ऐतिबार से बिलकुल दुरुस्त नहीं है क्यूंकि क़ज़ा नमाज़ो को पूरा पढ़ना बिलकुल ज़रूरी है ,

नीज़ इस हदीस के बारे में उलमा ए हदीस के अक़वाल भी देख ले :

قال الشيخ العلامة عبد الحي اللكنوي: “حديث من قضى صلوات من الفرائض في آخر جمعة من رمضان كان ذلك جابراً لكل صلاة فائتة من عمره إلى سبعين سنة. قال علي القاري في موضوعاته الصغرى والكبرى باطل قطعياً……..

(الآثار المرفوعة في الأخبار الموضوعة ص 85)

हज़रात अल्लाहमा अब्दुल है लखनवी रहमतुल्लाहि अलैहि फरमाते है की मुल्ला अली कारी रह . ने उसे बिलकुल बातिल और जूठी लिखा है ,

وقال الشيخ الشوكاني: “حديث من صلى في آخر جمعة من رمضان الخمس الصلوات المفروضة في اليوم الليلة قضت عنه ما أخل به من صلاة سنته.

هذا: موضوع لا إشكال فيه ولم أجده في شيء من الكتب التي جمع مصنفوها فيها الأحاديث الموضوعة………

(الفوائد المجموعة ص 54)

अल्लाहमा शौकनी रह . फरमाते है की यह हदीस एकदम -बिलकुल जूठी है जिसमे कोई शक नहीं ,मुझे उन किताबो में भी नहीं मिली जिसमे मौज़ू (जूठी ) अहादीस को जमा किया गया है .

खुलासाः ए कलाम यह की यह बिलकुल जूठी हदीस है लिहाज़ा

1. ऐसी हदीसो को social media में फ़ैलाने से बचना चाहिए वर्ण आप صلی الله عليه وسلم की इस रिवायत का हम भी मिस्दाक़ बन जायेंगे की

(من كذب علي متعمداً فليتبوأ مقعده من الناررواه البخاري)

“जिसने मेरी जानिब जान बुझ केर जूठी बात (हदीस) मंसूब की वो अपना ठिकाना जहन्नुम में बना ले ”

2. दीं की कोई भी बात किसी मोअतबर आलिमे दीन से पूछे बिना सोशल मीडिया में हरगिज़ न फैलाये .

अल्लाह तआला हमें दीन की सहीह समझ आता फरमाए .

जज़कल्लाहु खैरन

(शैखुल हदीस ) हज़रात मुफ़्ती खलील अहमद कविवाला

तस्दीक़ : मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमों

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आमीन

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