जानिए बीमारी, इलाज और इयादत की सुन्नतें पढ़ें अरबी की साथ दुआ

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Bimari Ilaj or Iyadad Ki Sunnatein
Dua
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Bimari Ilaj or Iyadad Ki Sunnatein

बीमारी, इलाज और इयादत की सुन्नतें

1. बीमारी मे दवा और इलाज करवाना मसनून है।

इलाज कराता रहे मगर बीमारी की शफ़ा में नज़र अल्लाह ही पर रखें ।

2. कलौंजी और शहद के साथ इलाज करना सुन्नत है

हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का इर्शाद है कि

अल्लाह तआलाह ने इन दोनों चीज़ो में शफ़ा रखी है।

इन दोनों की तारीफ़ में बहुत सी हदीसें आई हैं ।

3. इलाज के दौरान नुक़्सान पहुंचाने वाली चीजों से परहेज़ करना ।

4. अपने बीमार भाई की इयादत के लिए जाना सुन्नत है ।

5. बीमार पुर्सी करके जल्द लौट आना सुन्नत है कहीं तम्हारे ज़्यादा देर बैठने से

बीमार मलूल व रंजीदा न हो जाए। या घर वालो के काम मे खलल न पड़े ।

6. बीमार की हर तरह तसल्ली करना मसनून है।

मसलन उस से यह कहे कि इन्शा अल्लाह तुम जल्द अच्छे हो जाओगे।

ख़ुदा तआला बड़ी क़ुदरत वाला है। कोई डर या खौफ़ वाली बात बीमार से न कहे ।

7. बीमार पुर्सी रात में भी जाइज़ है। इसको जो लोग मनहूस कहते है वो गलती पर हैं।

इसी तरह बीमार की ख़बर मिले तो जब दिल चाहे इयादत कर आए।

ये जो ख़याल है कि तीन दिन बीमार के गुज़र जायें तो इयादत को जायें बे अस्ल बात है ।

8. जब किसी मरीज़ की इयादत के लिए जाए तो उस से यों कहे

“لا باسا توهورون إن شا الله”

“Laa Baasa Tuhoorun In Shaa Allahu”

(डर नहीं (ग़म न कर) अगर अल्लाह ने चाहा तो (यही बीमारी तुझे गुनाहों से) पाक करने वाली है)

फिर उसकी शफ़ा याबी के लिए सात बार यह दुआ पढ़े

“أَسْأَلُ اللَّهَ الْعَظِيمَ رَبَّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ أَنْ يَشْفِيَكَ”

“As’alullah Al-‘Azeem Rabbal ‘Arshil ‘Azeem an Yashfik”

(मैं अज़मत वाले अल्लाह से जो अर्श अज़ीम का मालिक हैं दुआ करता हु कि वो आपको शिफा अता फरमाए)

हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़र्माया है कि सात मर्तबा इसके पढ़ने से

मरीज़ को शफ़ा होगी हां अगर उसकी मौत ही आ गई हो तो दूसरी बात है ।

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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3 COMMENTS

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