पुलसिरात अज़ बस की बारिको तवीलो तेज़, उसके निचे एक दरिया आग से लबरेज़

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Ek farz ke bare mein mazduri ko puri mazduri dena
pul-e-sirat
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क़यामत, पुलसिरात, कौसर क्या चीज़ हैं?

मरने के बाद सबको ज़िंदा किया जायेगा और अल्लाह तआला की कचहरी में सबका हिसाब किताब होगा। अच्छे कामों पर सवाब और इनाम मिलेगा और बुरे कामों पर अज़ाब और सज़ा मिलेगी और उस ज़िन्दगी के बाद फिर कभी मौत नहीं आयेगी। उसको क़यामत और आलमेआख़िरतकहते हैं। जब दुनिया के ख़त्म होने का वक़्त आयेगा तो हज़रत इसराफ़ील (अ०) सूर बजायेंगे।

यह सूर बहुत बड़ी चीज़ सींग जैसा है। उसकी लम्बाई और चौड़ाई ज़मीन व आसमान के बराबर है। उसकी आवाज़ शुरू-शुरू में हल्की और नर्म होगी। आख़िर बढ़ते-बढ़ते ऐसी ऊँची और ख़ौफ़नाक हो जाएगी कि ज़मीन और आसमान फैट कर टुकड़े-टुकड़े हो जायेंगे और तमाम मख़लूक़ मर जाएगी और जो मर चुके होंगे उनकी रहें बेहोश हो जाएँगी। मगर जिसको अल्लाह तआला इस मुसीबत से बचना चाहेगा, वह बचे रहेंगे और एक मद्द्त ऐसी तरह गुज़र जाएगी।

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न कोई रहेगा न कोई रहा है,
यह मिटने की जा है मिटेगी हर एक शो।

ख़ुदा ही रहेगा ख़ुदा ही रहा है,
किसी का कहाँ नाम बाकि रहा है।

न दुनिया रहेगी न दुनिया की बातें,
फ़ना है फ़ना है हर एक को फ़ना है।

रहेगा तू ही और तू ही रहा है,
सिवा ज़ाते बारी के कुछ भी रहा है?

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अलहासिल जब अल्लाह तआला को मंज़ूर होगा कि तमाम मख़लूक़ फिर ज़िन्दा हों फिर सूर बजाय जायेगा। उसकी आवाज़ से तमाम मख़लूक़ फिर ज़िंदा हो जाएगी और आसमान व ज़मीन उसी तरह क़ायम हो जायेंगे और तमाम लोगों को क़यामत के मैदान में लाया जायेगा। सूरज बहुत करीब कर दिया जायेगा, उसकी गर्मी से लोगों के दिमाग हंडिया कि तरह पकने लगेंगे। इस तकलीफ और भूख-प्यास से घबराकर सब लोग अम्बिया (अ०) के पास जायेंगे और कहेंगे कि अल्लाह तआला के दरबार में हमारी शिफ़ाअत कीजिये और हमको हिसाबो-किताब से जल्दी छुड़ाए।

सब नबी कुछ न कुछ अज़र करेंगे और सबको बाद हमारे नबी हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल्म अल्लाह तआला से सिफ़ारिश करेंगे और मिज़ने तराज़ू खड़ी की जाएगी। उसमें अमल तोले जायेंगे और शाफ़ीए महशर हुज़ूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल्म अपनी नहर हौज़े कौसर का पानी पिलायेंगे जो दूध से ज़्यादा सफ़ेद और शहद से ज़्यादा मीठा होगा।

पुलसिरात:-
पुलसिरात, दोज़क के ऊपर पुल है जो बाल से ज़्यादा बारीक और तलवार से ज़्यादा तेज़ है, उस पर चलना पड़ेगा। जिन लोगों ने अल्लाह व रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल्म की ताबेदारी की होगी वह बिजली की तरह उस पर से पार होकर जन्नत में दाखिल हो जायेंगे और जो लोग अल्लाह व रसूल सल्ललाहु अलैहि व सल्ल्म के नाफ़रमान होंगे, वह काटकर दोज़क में गिर पड़ेंगे।

मोमिनो रहते हो क्यों बेफ़िक्र बेग़म बेख़बर।
एक सफ़र दरपेश है दुरो दराज़ो पुरख़तर।।

पुलसिरात अज़ बस की बारिको तवीलो तेज़ है।
उसके निचे एक दरिया आग से लबरेज़ है।।

नेको बद आमाल तोले जायेंगे मीज़ान में।
हो हिसाब ज़र्रा-ज़र्रा हश्र के मैदान में।।

तोशा-ए-आमाल अपना साथ लेकर जाओ जी।
पीछे क़ब्र में कौन भेजेगा सोचो तो सही।।

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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