मुसलमान वह है जिसकी ज़ुबान और हाथ से दूसरे मुस्लमान बचे रहें।

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Huzur ka mojza-Kankariyon se tasbeeh ki awaz ka aana
Muslim hand
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The Muslim is the one whose words and hands the other Muslims is safe

Abdullah bin Umar Razi Narrate That The Prophet (sallallahu alaihi wasallam) said

“The Muslim is the one whose words and hands the other Muslims is safe,

who are the ones who will leave those things which Allah has forbidden.” ”

Advantages:-

In this hadith, there is mention of only tongue and hand-to-hand trouble,

because most human troubles are linked to these two,

or else the glory of the Muslim is that other people do not get any kind of problems from them;

There is more to it that Momin is that,

so that other people’s blood remains safe.

It is a matter of regret that this is due to the disadvantage of the people,

because if the punishment is to be given to the criminals,

and to prevent the spread of strife (fighting-fights) with the strength of force,

then it is the real duty of Muslims.

(Aunulabari, 1/96)

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Hindi Translation

मुसलमान वह है जिसकी ज़ुबान और हाथ से दूसरे मुस्लमान बचे रहें।

अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ि. से रिवायत है, वह नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल्म से बयान करते हैं, अपने फ़रमाया : कि मुस्लमान वह है, जिसकी ज़ुबान और हाथ से दूसरे मुस्लमान महफूज़ रहें और मुहाजिर वह है जो उन चीज़ों को छोड़ दे, जिनसे अल्लाह ने मना किया है।”

फायदे : इस हदीस में सिर्फ ज़ुबान और हाथ से तकलीफ देने का ज़िक्र है, क्यूंकि ज़्यादातर इन्सानी तकलीफों का ताल्लुक इन्हीं दो से होता है, वरना मुस्लमान कि शान तो यह है कि दूसरे लोगों को उससे किसी किस्म की तकलीफ न पहुंचे, चुनांचे कुछ रिवायतों में यह ज़्यादा भी है कि मोमिन वह है, जिससे दूसरे लोगों के खून महफूज़ रहें। वाजेह रहे की इससे मुराद वह तकलीफ देना है जो बिला वजह हो, क्यूंकि बशर्ते कुदरत मुजरिमों को सजा देना और शरपसन्द लोगों के फसाद (लड़ाई-झगड़े) को ताकत के ज़ोर से रोकना तो मुस्लमान का असली फ़र्ज़ है।

(औनुलबारी, 1/96)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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