जानिए मैय्यत को ग़ुस्ल और कफ़न देने का सवाब कितना है

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Mayyat Ko Gusl Or Kafan Dene Ka Sawab
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Mayyat Ko Gusl Or Kafan Dene Ka Sawab

मैय्यत को ग़ुस्ल और कफ़न देने का सवाब

रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि-

जो शख्स किसी मैय्यत को बेउजरत अल्लाह के वास्ते ग़ुस्ल दे

तो गुनाहों से ऐसा पाक-साफ हो जाता है जैसा कि अपनी माँ के पेट से बेगुनाह पैदा हुआ था

और जो मर्द या औरत अल्लाह के वास्ते किसी मैय्यत को कफ़न पहनाये तो अल्लाहतआला उसको जन्नत के रेशमी कपड़े पहनायेगा ।

मसला – मैय्यत को उजरत लेकर ग़ुस्ल देना दरुस्त है मगर वैसा सवाब नहीं मिलेगा

और कोई अल्लाह के वास्ते क़ब्र बनवादे या बेउजरत क़ब्र खोदे और मैय्यत को उसमें दफ़न कर दे

तो उसको क़यामत तक ऐसा सवाब मिलता रहेगा जैस की अल्लाह के वास्ते

किसी ग़रीब आदमी को रहने का मकान बनवा दिया या सराय वग़ैरा बनवा दी तो सदक़ा जारिया का सवाब मिला करेगा ।

मसला – उजरत लेकर क़ब्र तैयार करना जायज़ है कोई गुनाह नहीं। आखिर पेट भी भरना जरुरी है।

मगर सवाब वैसा नहीं मिलता। आजकल बाज़ लोग मैय्यत के काम से डरते हैं।

ऐसा न होना चाहिए बल्कि मैय्यत की कोई खिदमत करके सवाब हासिल किया करें।

(बाग़े-जन्नत यानी ख़ुदाई बाग़ सफा न० 314)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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