कुरआन को भुला देने कि कितनी बड़ी सज़ा होगी, पढ़िए हदीस

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कुरआन को भुला देने कि सज़ा

रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फ़रमाते हैं कि –

जिसके सीने में कुछ भी कुरआन न हो वह ऐसा है कि जैसा उजड़ा हुआ घर।

और जिसने कुरआन पढ़ा और फिर उसको भुला दिया

और उसके हुक्मों पर अमल न किया कि यह भी एक तरह का भुला देना ही है

तो वह क़यामत के रोज़ अल्लाहतआला के सामने इस हाल में लाया जायेगा कि वह कोढ़ी होगा।

(अबुदाऊद)

फ़ायदा-

रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कुरआन पढ़ने कि बहुत ताकीद फ़रमायी है

कि वह हमेश पढ़ने से याद रहेगा वर्ना भूल जाओगे

और ऐसी बेमिसाल नैमत जो बड़ी मेहनत उठाकर हासिल की थी मुफ़्त में बर्बाद हो जायेगी।

ऐ कुरआन पाक के हाफ़िज़ों! इस आलीशान नैमत की क़दर करो और ख़ूब शौक से पढ़ा करो।

देखा! हाफ़िज़े क़ुरआन अगर ज़हन बग़ैरा की ख़राबी से हिफ़्ज़ न पढ़ सके

तो देखकर आसानी से इतना ज्यादा पढ़ सकता है कि देखकर पढ़ने वाला उसका मुक़ाबला नहीं कर सकता।

पढ़ के तू क़ुरआन को कुछ जमा कर ले अब सवाब,
क़ब्र पर कौन आयेगा फिर फ़ातेहा के वास्ते।

(बाग़े-जन्नत यानी खुदाई बाग़ सफा न० 222)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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