जानिए, मियाँ-बीवी की लड़ाई से शैतान कितना खुश होता है

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Jab Shohar Ke Bulane Par Biwi Inkaar Kar De To Farishte Subah Tak Us Aurat Par
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मियाँ-बीवी की लड़ाई से शैतान खुश होता है

रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से दरयाफ़्त किया गया की या रसूल अल्लाह!

सबसे अच्छी औरत दुनिया में कौन है?

इरशाद फ़रमाया-

वह औरत है कि जब उसका शौहर उसकी तरफ़ देखे तो उसको खुश कर दे

और उसका कहा माने और जान व माल में कोई बात उस की मर्ज़ी के खिलाफ़ न करे और बग़ैर उसकी इजाज़त के घर से बाहर न जावे।

और इरशाद फ़रमाया हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने की-

शैतान हमेशा रात को समन्दर के ऊपर अपना तख़्त बिछा कर उस पर बैठता है

और अपने सिपाहियों से पूछता है की आज तुमने आदमियों से खुदा की कौन-कौन-सी नाफ़मानी करवायीं।

जवाब में कोई कहता है की मैंने लोगों की नमाज़ कज़ा करवा दीं। कोई कहता है कि मैंने खून करवा दिया।

कोई कहता है मैंने शराब पिलवायी गरज़ अपनी-अपनी कारवाही और शरारतें बयान करते हैं

तो शौतन खफ़ा हो कर कहता है कि दूर हो जाओ! तुमने आदमियों को कुछ भी नुक़सान नहीं पहुँचाया।

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फिर एक और शैतान कहता है कि मैंने मर्द और बीवी कि लड़ाई करा दी,

यह बात सुनकर शैतान बहुत खुश होता है और ख़ुशी में ख़ूब नाचता-कूदता है

और उस शैतान को गले लगाकर कहता है कि शाबाश।

जीते रहो, तुमने ख़ूब काम किया और यह काम सब बुरे कामों से बेहतरीन काम है।

फायदा-

मुसलमान भाइयो और बहिनो! इस क़िस्म से सबक़ सीखो और आपस में लड़ाई-झगड़ा करके शैतान को खुश न करो।

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एक दिन दुख्तर के घर हज़रत उमर
इत्तफ़ाकन जो गये वह ख़ुश सयर।

घर में था दुख्तर के फ़ाके का ज़हूर,
और थी दो दिन के फ़ाके से वह चूर

जोशे उल्फ़त से अपने बाद पास,
जा के बेटी दुख्तरे ख़स्ता हवास।

नागहां शौहर भी आया उसका घर,
वो रही बेटी उसी खुश सयर।

अपने शौहर से न की जब उसने बात,
देखकर नाख़ुश हुए वह बासिफ़त।

अपनी दुख्तर के तमाचा मारकर,
उस से यूँ कहने लगे हज़रत उमर।

जब तलक शौहर न बख़्शेगा तुझे,
खुल्द में मुश्किल है मिलनी जा तुझे।

शौहर अगर हो अपना मोहताजों फक़ीर,
ताज सर का उसको जानो और अमीर।

कह के यह घर आये वह आली सिफ़ात,
फिर कई दिन तक न की दुख्तर से बात।

बीवियों शौहर का रुतबा देखिये,
जानों दिल से उसका कहना मानियो।

(बाग़े-जन्नत यानी खुदाई बाग़ सफा न० 125)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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