क्या गुनाह करने वाला काफिर हो जाता है, पढ़िये यह हदीस

0
98
Islamic Palace App

गुनाह जाहिलियत के काम हैं और इसका करने वाला काफिर नहीं होता,

अलबत्ता शिर्क करने वाला ज़रूर काफिर होता है।

अबू जर गिफारी रज़ि. से रिवायत है,

उन्होंने फ़रमाया कि मैंने एक आदमी को गली दी कि उसे मां की आर दिलाई।

नबी सल्लाल्ल्हू अलैहि व सल्ल्म ने (यह सुनकर) फ़रमाया:

“क्या तूने उसे उसकी मां से आर दिलाई है? अभी तक तुम में जाहिलियत का असर बाकि है,

तुम्हारे गुलाम तुम्हारे कब्ज़े में रखा है, पस जिस आदमी का भाई उसके कब्ज़े में हो,

उसको चाहिए कि उसे वही खिलाये जो खुद खाता है

और उनसे वह काम न ले जो उन पर भरी गुज़रे

और अगर ऐसे काम की उन्हें तकलीफ दो तो खुद भी उनका हाथ बटावो ।”

फायदे :

दूसरी रिवायत में है कि हज़रत अबू जर रज़ि. ने हज़रत बिलाल रज़ि. को सिर्फ इतना कहा था कि ऐ काली-कलूटी औरत के बेटे! हमारे समाज में इस क़िस्म की बात गाली शुमार नहीं होती, बल्कि सिर्फ मज़ाक की एक क़िस्म है, लेकिन शरीअत ने उसे जाहिलियत के ज़माने की यादगार से ताबीर किया है।

(मुख़्तसर सहीह बुखारी, सफ़ा न० 34)

हमारा फेसबुक पेज लाइक करने के लिए यहाँ क्लिक करें…

अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

ISLAMIC PALACE को लाइक करने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया। जिन्होंने लाइक नहीं किया तो वह इसी तरह की दीन और इस्लाम से जुड़ी हर अहम बातों से रूबरू होने के लिए हमारे इस पेज Islamic Palace को ज़रूर लाइक करें, और ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को शेयर के ज़रिये पहुंचाए। शुक्रिया

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.