पानी न मिले और नमाज़ के कज़ा होने का डर हो तो हज़र में तयम्मुम करना केसा है?

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पानी न मिले और नमाज़ के कज़ा होने का डर हो तो हज़र में तयम्मुम करना

अबू जुहैम बिन हारिस अन्सारी रज़ि. से रिवायत है,

उन्होंने फ़रमाया कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल्म एक बार जमल के कुए कि तरफ से आ रहे थे

कि रस्ते में एक आदमी मिला, उसने आपको सलाम किया,

लेकिन नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल्म ने उसका जवाब न दिया।

यहां तक कि आप एक दिवार के पास आये और उससे आपने मुंह

और हाथों का मसह किया, यानी तयम्मुम फ़रमाया। फिर उसके सलाम का जवाब दिया।


फायदे :

जब सलाम का जवाब देने के लिए तयम्मुम जायज़ है तो हज़र में नमाज़ के लिए

और ज़्यादा जायज़ होगा, जबकि पानी मौजूद न हो और नमाज़ का वक़्त खत्म हो रहा हो।

(मुख़्तसर सहीह बुखारी, सफ़ा न० 178)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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