मारने वाले और मरने वाले में से कौन जहन्नमी? जानिए नबी ﷺ क्या फ़रमाया

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Nahak Khoon karne ki Saza
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और अगर ईमान वालों में दो गिरोह आपस में झगड़ पड़ें तो उनके बीच समझौता कराओ।

अबू बकरा रज़ि. का बयान है कि मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल्म से सुना,

आप फार्मा रहे थे, ” जब दो मुस्लमान अपनी अपनी तलवारें लेकर आपस में झगड़ पड़ें

तो मरने वाला और मारने वाला दोनों जहन्नमी हैं”

मैंने अर्ज़ किया कि ऐ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल्म!

मारने वाला (तो ज़रूर जहन्नमी है) लेकिन मरने वाला क्यों जहन्नमी होगा?

आपने फ़रमाया : “उसकी नियत भी दूसरे साथी को मारने कि थी।”

फायदे :

मालूम हुआ कि जब दिल का इरादा पुख्ता हो जाये तो उस पर भी पकड़ होगी,

जबकि दूसरी रिवायत में है कि अल्लाह तआला ने उम्मत के दिली ख़्यालात को माफ़ कर दिया है,

जब तक उनके मुताबिक अमल न करें। इन दोनों बातों में फर्क नहीं,

क्यूंकि ऐसे ख़्यालात पर पकड़ नहीं होगी, जो मज़बूत न हों, यानी आयें और गुज़र जायें।

अलबत्ता पुख्ता पुख्ता इरादे पर ज़रूर पकड़ होगी, अगरचे उसके मुताबिक अमल किया जाये।

(औनुलबारी, 1/132)

(मुख़्तसर सहीह बुखारी, सफ़ा न० 35)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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