पढ़िये एक औरत के साथ हुआ एक बहुत प्यारा किस्सा

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पाक मिटटी मुस्लमान का वुज़ू है और उसे पानी के बदले काफी है।

इमरान बिन हुसैन खुजाई रज़ि. से रिवायत है, उन्होंने फ़रमाया कि हम एक बार नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल्म के साथ सफर में थे

और रातभर चलते रहे। जब आखिर रात हुई तो हम कुछ देर के लिए सो गये

और मुसाफिर के नज़दीक इस वक़्त से ज़्यादा कोई नींद मीठी नहीं होती।

ऐसे सोये कि सूरज की गर्मी से ही जगे। सबसे पहले जिसकी आंख खुली, वह फलां आदमी था,

फिर फलां आदमी और फिर फलां आदमी। फिर चौथे उमर बिन खत्ताब रज़ि. जगे

और (हमारा कायदा यह था कि) जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल्म आराम करते तो कोई आपको नहीं जगाता था।

यहां तक कि आप खुद जाग जाते, क्यूंकि हम नहीं जानते थे कि आपको खुवाब में क्या पेश आ रहा है?

जब हज़रत उमर रज़ि. ने जागकर वह हालत देखि जो लोगों पर छायी हुई थी और वह दिलेर आदमी थे।

उन्होंने ज़ोर से तकबीर कहना शुरू की। और वह बराबर अल्लाहु अकबर बुलंद आवाज़ से कहते रहे।

यहां तक कि उनकी आवाज़ से रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल्म जाग गये।

जब आप जाग उठे तो लोगों ने आपसे इस मुसीबत की शिकायत की जो उन पर पड़ी थी।

आपने फ़रमाया, कुछ हर्ज़ नहीं या उससे कुछ नुकसान न होगा। चलो अब कूच करो। फिर लोग रवाना हुए।

थोड़े से सफर के बाद आप उतरे, वुज़ू के लिए पानी मंगवाया और वुज़ू किया। नमाज़ के लिए अज़ान दी गयी,

उसके बाद आपने लोगों को नमाज़ पढ़ाई। जब आप नमाज़ से फारिग हुये तो अचानक एक आदमी को तन्हाई में बैठे देखा,

जिसने हम लोगों के साथ नमाज़ न पढ़ी थी। आपने फ़रमाया,

ऐ फलां आदमी! तुझे लोगों के साथ नमाज़ पढ़ने से कोनसी चीज़ ने रोका? उसने अर्ज़ किया कि मैं नापाक हूँ और पानी मौजूद न था।

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आपने फ़रमाया, तुझ्र मिटटी से तयम्मुम करना चाहिए था, वह तुझे काफी है।

फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल्म चले तो लोगों ने आपसे प्यास की शिकायत की।

आप उतरे और अली रज़ि. और एक दूसरे आदमी को बुलाया। और फ़रमाया तुम दोनों जाओ और पानी तलाश करो।

इस पर वह दोनों रवाना हुये तो रास्ते में उन्हें एक औरत मिली जो अपने ऊँट पर पानी की दो मश्कों के दरमियान बैठी हुई थी।

उन्होंने उससे कहा कि पानी कहाँ है? उसने जवाब दिया कि पानी मुझे कल इसी वक़्त मिला था और हमारे मर्द पीछे हैं।

इन दोनों ने उससे कहा कि हमारे साथ चल, उसने कहा कहां जाना है? उन्होंने कहा, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल्म के पास।

वह बोली जिसे दीन कहा जाता है। उन्होंने कहा, हां वही है, जिन्हें तू ऐसा कहती है। चल तो सही।

आखिर वह दोनों उसे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास ले आये

और आपसे सारा किस्सा बयान किया। हज़रात इमरान रज़ि. ने कहा कि लोगों ने ऊँट से उतर लिया

और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल्म ने एक बर्तन मंगवाया। और दोनों मश्कों के मुंह उसमें खोल दिये।

फिर ऊपर का मुंह बन्द करके निचे का मुंह खोल दिया और लोगों को खबर कर दी गयी कि खुद भी पानी पिये और जानवरों को भी पिलायें।

तो जिसने चाहा खुद पिया और जिसने चाहा, जानवरों को पिलाया।

आखिरकार अपने यह किया कि जिस आदमी को नहाने कि ज़रूरत थी,

उसे भी पानी का एक बर्तन भर दिया और उससे कहा कि जाओ, इससे ग़ुस्ल करो।

वह औरत कड़ी यह मंज़र देखती रही कि उसके पानी के साथ क्या हो रहा है?

अल्लाह कि कसम! जब पानी लेना बन्द हो गया तो हमारे ख्याल से मुताबिक वह अब उस वक़्त से भी ज़्यादा भरी हुई थी, जब आपने लेना शुरू किया था।

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फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्ल्म ने फ़रमाया कि इस औरत के लिए कूच जमा करो।

लोगों ने खुजूर, आटा और सत्तू जमा करना शुरू कर दिया, यहां तक कि एक अच्छी मिक़्दार उसके पास जमा हो गयी।

जमा किया हुआ सामान उन्होंने एक कपड़े में बांध दिया और उसे ऊँट पर सवार कर के वह कपड़ा उसके आगे रख दिया

फिर आपने उससे फ़रमाया, तुम जानती हो कि हमने तुम्हारे पानी में से कूच कमी नहीं की,

बल्कि हमें तो अल्लाह ने पिलाया है। फिर वह औरत आपने घर वालों के पास वापस आयी। चूंकि वह देर से पहुंची थी,

इसलिए उन्होंने पूछा, ऐ फलां औरत! तुझे किसने रोक लिया था? उसने कहा, मेरे साथ तो एक अजीब किस्सा पेश आया।

और वह यह कि (रास्ते में) मुझे दो आदमी मिले जो मुझे उस आदमी के पास ले गये, जिसको बे दीन कहा जाता है। उसने ऐसा ऐसा किया।

अल्लाह कि कसम! जितने लोग इस (आसमान) के और इस (ज़मीन) के बीच हैं और उसने आपने बीच वाली

और शाहदत वाली ऊँगली उठाकर आसमान और ज़मीन कि तरफ इशारा किया।

उन सब में से वह बड़ा जादूगर है या वह अल्लाह का हकीकी रसूल है।

फिर मुसलमानों ने यह करना शुरू कर दिया कि उस औरत के आस पास जो मुशरिक आबाद थे,

उन पर तो हमला करते और जिन लोगों में वह औरत रहती थी, उनको छोड़ देते।

आखिर उसने एक दिन अपनी कौम से कहा कि मेरे ख्याल में मुस्लमान तुम्हें जानबूझ कर छोड़ देते हैं

क्या तुम्हें इस्लाम से कूच लगाव है? तब उन्होंने उसकी बात कुबूल की और मुस्लमान हो गये।

(मुख़्तसर सहीह बुखारी)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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