ज़मज़म के पानी की बरक़त कितनी है, पढ़िए हदीस

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Zam Zam Ke Pani Ki Barkat

ज़मज़म के पानी की बरक़त

मुस्लिम शरीफ़ में है कि रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि-

बेशक ज़मज़म का पानी बरकत वाला है और खाना है आसूदगी।

फायदा

यानी जैसे खाना खाने से भूख नहीं रहती वैसे ही ज़मज़म का पानी पीने से भूख नहीं रहती।

जबकि कोई इस नियत से पीवे। शुरू इस्लाम में जब हज़रत अबुज़र बुखारी (रज़ी०) ने हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कि नबूबत कि खबर सुनी तो मक्का में आये।

उस वक्त काफिरों का ज़ोर था। इसलिए वह हुज़ूर का किसी से हाल न पूछ सके। आखिर एक रोज़ मुलाक़ात का मौका मिल गया।

हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने दायाफ़्त फ़रमाया की-

तुम कब से आये हुए हो? उन्होंने अर्ज़ की कि एक महीना हो गया।

हुज़ूर ने फ़रमाया खाते कहा से हो? अर्ज़ कि सिवाय ज़मज़म के पानी के और कुछ खाने को नहीं मिलता।

तब हुज़ूर ने आब-ए-ज़मज़म कि यह बरकत बयान फ़रमायी-

अगर कोई चीज़ मरीज़ सेहत कि नीयत से ज़मज़म का पानी पिया करे या दूसरे पानी में चन्द क़तरे मिलाकर बहुत-सा पानी बना ले

और पिया करे तो इन्शाल्लाह सेहत होगी मगर जब पिये तो मुँह काबे शरीफ़ की तरफ़ करे और खड़े होकर पिये तो बहुत बेहतर है।

ज़मज़म के मानी है रुकजा”। यह अल्फ़ाज़ हज़रत हज़रत (अ० स०) के हैं ।

(बाग़े-जन्नत यानी खुदाई बाग़ सफा न० 276)

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