यमन के एक शहर पर अल्लाह तआला का अज़ाब, पढ़ें इस्लामी तारीख | शेयर करें

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Islami Tareekh Kaum-e Sabha
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Islami Tareekh Kaum-e Sabha

इस्लामी तारीख क़ौमे सबा

यमन में दो पहाड़ों के दर्मियान मआरिब नामी शहर में “क़ौमे सबा” आबाद थी,

यहाँ के बादशाहों ने उन दोनों पहाड़ों के दर्मियान एक निहायत मज़बूत बन्द (डेम) बनवाया था,

जो सद्दे मआरिब के नाम से मशहूर था।

यह बन्द शिमाल व जुनूब दोनों तरफ पहाड़ों से आने वाले पानी को रोके रखता था,

इस पानी की वजह से उन के दारुलहकूमत शहरे मआरिब के दोनों जानिब तक़रीबन तीन सौ मुरब्बा मील तक ख़ूब सूरत बाग़ात,

हरी भरी खेतियाँ, क़दम क़दम पर ख़ुशबूदार फूल और उमदा उमदा मेवों के दरख़्त लगे हुए थे,

क़ौमे सबा एक ज़माने तक अल्लाह के अहकाम पर अमल करती रही|

मगर फिर वह उन नेअमतों में पड़ कर एक अल्लाह को भूल गई और कुफ्र व नाफ़रमानी में मुब्तला हो गई,

अल्लाह तआला ने उन की इस्लाह के लिये मुतअदद अम्बियाए किराम को भेजा,

लेकिन उन लोगों ने किसी नबी की दावत को क़बूल नहीं किया

और गुमराही और अल्लाह तआला की नाफ़रमानी में बढ़ती चली गई,

बिलआख़िर अल्लाह तआला ने उन लोगों पर अज़ाब नाज़िल किया

और जिस मज़बूत बन्द (डेम) पर उन्हें बड़ा नाज़ था, उस को तोड़ कर पुरे शहर, बाग़ात और खेतों को बरबाद कर दिया,

अल्लाह तआला ने कुरआन में उन का तज़केरा करते हुए फ़र्माया :

“हम ने (उन लोगों के) कुफ्र व नाफ़रमानी का यह बदला दिया और हम कुफ्र व नाफ़रमानी का इसी तरह बदला दिया करता हैं।”

(सूर-ऐ-सबा : 17)

(सिर्फ पाँच मिनट का मद्रसा, सफ़ा न० 145)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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