हज करने का बयान; क्या खबर कि जिन्दगी कितनी है, कहीं ऐसा न हो अल्लाह का हुक्म सर पर रह जाये

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हज करने का बयान

मालूम होना चाहिए कि अल्लाहतआला ने अपनी मेहरबानी से हज भी मालदरों पर फ़र्ज़ कर दिया है। इसके इन्कार करने वाला काफ़िर और इसको अदा न करने वाला फ़ासिक़ और सख्त सज़ा का मुस्तहक़ है। तमाम उम्र में एक दफ़ा उस आदमी पर हज फ़र्ज़ हो जाता है जिसको हक़ तआला ने इतना माल दिया हो कि अपने वतन से मक्का शरीफ़ में चला जाये और फिर वहां से वतन में आ जाये और अपने बाल बच्चों का ख़र्च अपने आने तक का दे जाये।

अल्लाहतआला ने इरशाद फ़रमाया है कि-

ऐ लोगो! तुम पर अल्लाह के घर का हज करना फ़र्ज़ है। जिस आदमी को वहां जाने कि कुदत हो और हादी-ए-आज़म सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि जिस आदमी कि कोई ज़ाहिरी मज़बूरी हज को रोकने की न हो जैसे बीमारी या रास्ते का खतरा या कोई हकूमत न जाने दे और फिर वह बेहज किये मर जाये तो उसको अख्तियार है की चाहे यहूदी होकर मरे या ईसाई इसलिए ज़रूरी है कि जिस पर हज फ़र्ज़ हो उसको हज के अदा करने में बहुत जल्दी करना चाहिए।क्या खबर है कि जिन्दगी कितनी है। कहीं ऐसा न हो कि यह अल्लाह का हुक्म सर पर रह जाये। अगर हज सफर में जान का या माल का नुकसान हो जाये तो परेशानी न होना चाहिए,बल्कि इसको हज के क़बूल होने कि निशानी समझे और अल्लाहतआला से सवाब कि उम्मीद रखे।

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हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि-

जो मर्द या औरत हज की नियत से अपने घर से निकला और वह रास्ते ही में मर जाये तो क़यामत तक हर साल उसको हज और उमरा करने का सवाब मिलता रहेगा और जो मर्द या औरत हज करने को मक्का शरीफ़ में या मदीने शरीफ़ में मरेगा वह बेहिसाब दिये जन्नत में जायेगा।

है दौलतमंदों पर फर्ज़े इलाही हज्जे बैतउल्लाह
तो लाज़िम है उन्हें समझे जरुरी हज्जे बैतउल्लाह।

नहीं है एतबारे ज़िन्दगी गफलत नहीं अच्छी,
बजा है हुक्म हक़ कर आयें जल्दी हज्जे बैतउल्लाह।

अगर आ जाये मौत इत्तफ़ाक़न इस सफर मुबारक में,
तो दिलवाता है यह अज़्रे दवामी हज्जे बैतउल्लाह।

गरज कि इस सफर में हर तरह खूबी ही खूबी है,
निहायत है सआदत की निशानी हज्जे बैतउल्लाह।

(बाग़े-जन्नत यानी ख़ुदाई बाग़, सफा न० 272)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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