माशाअल्लाह : हरम शरीफ की चन्द झलकियां

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Haram Shareef Ki Chand Jhalkiyan
Haram Sharif
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Haram Shareef Ki Chand Jhalkiyan

हरम शरीफ की चन्द झलकियां

हरम शरीफ में तीस हज़ार पंखे हैं। बीस हज़ार फानूस हैं।

उन फानूसों में चालीस हज़ार बलब हैं। हर मनार पर सुर्ख लालटेन हैं।

हर लालटेन में पांच हज़ार वाल्ट के छ: छ: बलब लगे हैं।

जिस से ख़ास क़िस्म की रोशनी निकलती रहती है।

जिस का मक़्सद है कि दूर दराज़ से आने वाले जाइरीन रहती है।

जिस का मक़्सद है कि दूर दराज़ से आने वाले जाइरीन को हरम शरीफ़ की निशानदेही हो।

हरम शरीफ में तीन हज़ार इलेक्ट्रानिक घड़ियाँ लगी हैं जो दुनिया की मुख्तलिफ ज़बानों के कम्प्युटर के ज़रिए चलती हैं।

सफ़ा और मरवा में इयर कन्डीशन के ज़रिए चालीस यूनिट के बलब लगाए गए हैं।

हुज्जाजे किराम की आसनियों के लिए उस पर और मज़ीद पुल बनाए गए हैं।

ज़म ज़म को टण्डा रखने के लिए दस लीटर मकअब फ़ी घन्टा पानी पहुँचाया जाता है।

हरम शरीफ़ में छे: हज़ार वाटर कूलर है जिस में चालीस लीटर पानी हर वक़्त भरा रहता है।

यहां पर एक ही क़िस्म के पचास दरवाज़े हैं। हर दरवाज़े पर बाब लिखा हुआ है।

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जाइरीन को दूर से ही पहचानने में मदद देते हैं।

अनपढ़ भी रंगीन ट्यूब के ज़रिए अपने मक़ामी गेट के पास आसानी से पंहुच सकते हैं।

हर मेन गेट पर बाब का नाम लिखा है जो खुलफ़ा सहाबा और बादशाहों के नाम से जाना जाता है।

उन नामों की मदद से जाइरीन को आने जाने में मदद मिलती है।

हरम शरीफ़ की देख रेख के लिए हुज्जाजे किराम की खिदमत के लिए और सफाई व सुथराई के लिए हज़ार ख़ादिम मुक़र्रर हैं।

ज़िला-हिज्जा और रमज़ान शरीफ़ में दूर दराज़ से खुद्दाम बुलाए जाते हैं।

जो हमा वक़्त वहां मौजूद रहते हैं। हज के दौरान मुख्तलिफ ममालिक के मख़्सूस अस्पताल होते हैं।

जिस से हर मुल्क की इलाक़ाई जवान में बात करने में आसानी होती है।

हरम शरीफ़ में फ़िलहाल तीस लाख हुज्जाजे किराम एक वक़्त में नमाज़ अदा कर सकती हैं।

जाइरीन की तादाद को देखते हुए उसकी तैसिअ की जा रही है।

हरम शरीफ़ में काफिर और मुशरिक का दाखिला मन्नुअ है।

तमाम मुसलमान मर्द औरत बूढ़े बच्चे सब दाखिल हो सकते हैं।

दुनिया के बुत कदों में पहला वह घर खुदा का हम उसके पास्वां हैं वह पास्वां हमारा

(तारीख़े आलम सफ़ा न० 52)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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