कुरआन मजीद में आने वाले अल्क़ाब

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Quran Majeed Mein Ane Wale Alqab

कुरआन मजीद में आने वाले अल्क़ाब

इस्राईल:

हज़रत याकूब अलैहिस्सलाम का लक़ब है। उनकी औलाद को बनी इस्राईल कह कर मुख़ातब किया गया।

मसीह: हज़रत इसा अलैहिस्सलाम का लक़ब है।

ईसा का मतलब है कि जिस मरीज़ पर हाथ फेरे वह तन्दुरुस्ती पाता है।

ईसा अलैहिस्सलाम के मानने वालों को ईसाई कहा जाता है।

ज़ुल-किफ़्ल:

बाज़ फुक़्हा का कौल है हज़रत यूशअ का लक़ब है। बाज़ का कौल है हज़रत लैस का और बाज़ का कौल है हज़रत ज़करिया अलैहिस्सलाम का लक़ब है। ज़ुल-किफ़्ल का मतलब है दोबारा ज़िन्दा होना।

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ज़ुल-करनैन:

उनका नाम इस्कन्दरिया या अब्दुल्लाह है, जुल-करनैन का लक़ब इसलिए हुआ कि उनकी हुकूमत मशरिक से तक थी मग़्रिब तक थी। इसके अलावा वह दो बड़े मुल्क रूम और फारस (ईरान) के बादशाह थे। उनके पास दो सींग थे जो टोपी में छुपाए रखते थे।

फ़िरऔन:

असल नाम मुसअब बिन वलीद था। जो हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के दौर का बादशाह था। उस दौर में मिस्र के बादशाहों का नाम फिरऔन हुआ करता था।

तबअ:

असल नाम मुल्की करब था। उसके मोतक़िद बकसरत थे। यह शाहान का लक़ब है।

अबू लहब:

असल नाम अब्दुल-उज़्ज़ा था। जिसका मतलब है उज़्ज़ा (बुत।) को खुदा जानना,इसलिए उसका नाम लेना हराम है इसलिए उसे अबू लहब कहा गया और वह हतमी भी है।

(तारीख़े आलम सफ़ा न० 65)

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