क़िबला रुख होकर अहराम बांधना

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Kibla Rukh Hokar Ehram Bandhna
Makkah
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Kibla Rukh Hokar Ehram Bandhna

क़िबला रुख होकर अहराम बांधना।

इब्ने उमर रज़ि. से रिवायत है कि वह जुल हुलैफा में तलबिया कहते

और हरम में पहुंचकर उसे बन्द कर देते और मकामे तुवा के पास पहुंचकर रात गुजारते थे।

सुबह कि नमाज़ पढ़ने के बाद वहीँ नहाते और कहा करते थे कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्ल्म ने ऐसा ही किया है।

फायदे :

हज़रात इब्ने उमर रज़ि. हरम की जमीन पर पहुंचकर तलबिया बन्द कर देते और तवाफ और सई में लग जाते,

फिर जब बैतुल्लाह के तवाफ और सफा मरवाह की सई से फारिग हो जाते

तो तलबिया शुरू कर देते, जैसे कि इब्ने खुजैमा की रिवायत में सराहत है।

(औनुलबारी, 2/536)

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