नए साल का इस्तेकबाल, जानिए जब नया साल या नया महीना शुरू हो तो क्या पढ़ें?, इस दुआ को खूब आम करें, इसलिए….

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नए साल का इस्तेकबाल
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नए साल का इस्तेकबाल

आइये! नए साल का इस्तेकबाल, तर्ज़े सहाबा रज़ि. पर करें!

हदीस की किताबों में है की जब नया साल शुरू होता तो रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के सहाबा एक दूसरे को ये दुआ सिखाते और बताते थे।

اللَّهُمَّ أَدْخِلْهُ عَلَيْنَا بِالأَمْنِ ، وَالإِيمَانِ ، وَالسَّلامَةِ ، وَالإِسْلامِ ، وَرِضْوَانٍ مِنَ الرَّحْمَنِ ، وَجَوَازٍ مِنَ الشَّيْطَانِ
“अल्लाहुम्मा अदखिलहु अलाइना बिल-अमनी वल-इमानि वस्सलामाती वल-इस्लामी, व रिज़वानिममीनार-रहमानी व जिवारिम मिनश्शैतानी”
(Allahumma Adkhilhu Alaina Bil-amni wal-Imaani wassalaamati wal-Islaami, wa Rizwanim minar-Rahmaani wa Jiwarim minashshaitaani)

तर्जुमा: ऐ अल्लाह! इसको हम पर अमन-और-ईमान और सलामती के साथ रहमान की ख़ुशनूदी और शैतान से हिफाज़त के साथ लाइये।

इस दुआ को खूब आम करें, इसलिए की

हज़रात अनस बिन मलिक रज़ि. (रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का इरशाद फरमाते हैं कि:

जिस शख्स ने मेरी सुन्नत को ज़िंदा किया उसने मुझसे मोहब्बत कि, और जिसने मुझसे मोहब्बत कि वो जन्नत में मेरे साथ होगा।

(अल-मजमूल औसत हदीस न०. 9439)

Note: इस्लामी साल मुहर्रम के महीने से शुरू होता है।

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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