जानिए बच्चे के लिए सबसे बड़ी नैमत क्या है

0
132
Ek bachche ke liye sabse badi naimat
Ek bachche ke liye sabse badi naimat
Islamic Palace App

Ek bachche ke liye sabse badi naimat

Ek bachche ke liye sabse badi naimat

यह एक बड़ी नेमत है

एक औरत के दिल में बच्चे की कितनी मुहब्बत होती है इसका कोई अन्दाज़ा नहीं लगा सकता।

जवान बच्चियां इस बात को नहीं समझ सकतीं। जब तक वे ज़िन्दगी के उस हिस्से तक न पहुंचे।

जब खुद माँ बनेंगी तब महसूस होगा कि माँ मुहब्बत क्या चीज़ है। यह अल्लाह रब्बुल-इज़्ज़त ने माँ के दिल में रख दी।

क्योंकि उसे परवरिश करनी थी, उसे बच्चों को पालन था। माँ के दिल में ऐसी मुहब्बत है कि बच्चों को हर मामले में ऊपर तरजीह देती है।

एक बच्ची जिसकी शादी को चन्द साल हो गये औलाद नहीं हो रही।

अपने घर में ग़मगीन बैठी मुसल्ले पर रो रही है, दुआयें मांग रही है:

ऐ अल्लाह! मुझे औलाद अता फरमा दे। अगर कोई इस बच्ची से पूछे कि तुम्हें अल्लाह ने हुस्न व जमाल और सुन्दरता अता फरमायी है,

अच्छी तालीम अता की, मुहब्बत करने वाला शौहर अता किया, माल व दौलत के ढेर अता किये। दुनिया की इज़्ज़तें अता कीं।

हमारा फेसबुक पेज लाइक करने के लिए यहाँ क्लिक करें…

हर नेमत तुम्हारे पास मौजूद है। क्यों परेशान हो? वह जवाब देगी की एक नेमत ऐसी है जो सबसे बड़ी है।

मैं अल्लाह से वह माँग रही हूँ। यह हज पर जायेगी तो तवाफ़े-काबा के बाद औलाद की दुआयें करेगी।

मक़ामे इब्राहीम पर सज्दे करेगी तो औलाद की दुआयें करेंगी।

काबा के ग़िलाफ़ को पकड़ेगी तो औलाद की दुआयें करेगी।

तहज्जुद की नमाज़ पढ़ेगी तो औलाद की दुआयें करेगी।

कभी शबे-क़द्र में जागना नसीब हो तो औलाद की दुआयें करेगी।

किसी नेक बुजुर्ग की महफ़िल में जाने का इत्तिफ़ाक़ हुआ तो औलाद की दुआयें करेगी।

आख़िर यह कैसी नेमत है। जिसकी वजह से मग़मूम है, परेशान है।

हालाँकि बच्ची जानती है कि जब मै माँ बनने लगूँगी तो नौ महीने का समय मेरी बीमारी में गुज़रेगा।

न मेरा दिल कुछ खाने को चाहेगा।

जो खाऊँगी कई बार वह भी बाहर निकल आयेगा। मुझे भूख बरदाश्त करनी पड़ेगी।

बीमारों जैसी जिन्दगी गुज़ारनी पड़ेगी। मगर उसके दिल में ऐसी मुहब्बत होती है कि इस सब को बरदाश्त करने के लिए तैयार होती है।

उसको यह भी पता है कि जब बच्चे की पैदाईश का वक़्त आता है

तो औऱत को इस क़द्र तकलीफ होती है कि उसकी ज़िंदगी और मौत का मसला होता है।

बच्चा अपंग भी हो सकता है, माँ की मौत भी हो सकती है। लेकिन इस सबके बावजूद इस मशक़्क़त को उठाने के लिए तैयार है।

उसे यह भी पता है कि जब बी बच्चा हो जायेगा तो दो साल के लिए मुझे रातों को सोने का मौक़ा नहीं मिलेगा।

मैं सारा दिन बच्चे के काम करुँगी और रात को भी बच्चे की ख़ातिर जागूँगी।

(औरतों के लिए तरबियती बयानात, सफ़ा न० 31)

Follow Us

हमारा फेसबुक पेज लाइक करने के लिए यहाँ क्लिक करें…

अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

ISLAMIC PALACE को लाइक करने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया। जिन्होंने लाइक नहीं किया तो वह इसी तरह की दीन और इस्लाम से जुड़ी हर अहम बातों से रूबरू होने के लिए हमारे इस पेज Islamic Palace को ज़रूर लाइक करें, और ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को शेयर के ज़रिये पहुंचाए। शुक्रिया

 

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.