जो शख़्स सुबह को ये दुआ पढ़ ले तो अल्लाह उस पर सत्तर (70) हज़ार रेहमत के फ़रिश्ते मुक़र्रर फ़रमा देगा

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Ek Dua jise Subah Padhne Se Allah 70 Hazar Rehmat ke Farish Mukarar Farma dega
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Ek Dua jise Subah Padhne Se Allah 70 Hazar Rehmat ke Farish Mukarar Farma dega

जो शख़्स सुबह को ये दुआ पढ़ ले तो अल्लाह उस पर सत्तर (70) हज़ार रेहमत के फ़रिश्ते मुक़र्रर फ़रमा देगा

हज़रत माक़ल बिन यसार रज़िअल्लाहुअन्हु का बयान है कि

अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इर्शाद फ़रमाया कि जो शख़्स सुबह को तीन बार ये

أَعُوذُ بِاللهِ السَّمِيعِ الْعَلِيمِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ
‘आऊजु बिल्लाह इल-समी’ इल-‘अलीम मिन अल-शैतान इर-रजीम
A’oodhu Billaah il-samee’ il-‘aleem min al-Shaytaan ir-rajeem

पढ़ कर सूर: हशर की आख़िरी तीन आयतें-

“हुवल्लाहुल्लज़ी ला इलाहा इल्लाहु व आलि मुलगैबि वाशशहादति हुवार्रेह्मान्निररहीम हुवल्लाहुल्ल्जी ला इलाहा इल्लाहु-अल-मलि-कुल कुददूसुस्सलामुल मुअ मिनुल मुहैमिनुल अज़ीज़ुल जब्बारुल मु-त कब्बिरु सुब्हानल्लाही अम्मा युशिरकून हुव ल्ला हल ख़ालिकुल बा-रिउल मुसब्बीरू लहुल असमाउल हुस्ना युसबेब लहुम फिस्समावाती वाल अर्ज़ी व हुवल अज़ीज़ुल हकीम०”

Hu wallahu ladhila illaha illa hu alim al ghaib wa shahadati Hu ar rahman ar rahim Huwallahu ladhila illaha illa hu al malik ul quddus as salaam ul mutmin ul muhaiymin al aziz ul jabbar ut mutakabbir Subhanallah hi amma yusrikun Hu wallahu al khaliq ul bari ul mussawir La hul asma ul husna yusabuhu lahuma fi semaawaati wal ard wa huwal aziz al hakim

तर्जुमा –

वह अल्लाह (ऐसा है) कि उस के सिवा कोई माबूद नहीं, वह ग़ैब

और छिपी बातों का जानने वाला है, वह रेहमान व रहीम है।

वह अल्लाह (ऐसा है) कि उसके सिवा कोई माबूद नहीं।

वह बादशाह है, पाक है, सलामती वाला है, अमन देने वाला है, निगहबानी करने वाला है।

अज़ीज़ है, जब्बार है, अज़मत वाला है, अल्लाह उस शिर्क से पाक है, जो वे करते हैं, वह अल्लाह पैदा करने वाला है ठीक-ठीक बनाने वाला है।

उसके अच्छे-अच्छे नाम हैं जो भी चीज़ें आसमानों और ज़मीनों में हैं, सब उसकी तस्बीह बयान करती हैं और वह ज़बरदस्त हिकमत वाला है।

पढ़ ले तो उसके लिए अल्लाह ताला सत्तर हज़ार फ़रिश्ते मुक़र्रर फ़रमा देगा

जो शाम तक उस पर रेहमत भेजते रहेंगे और अगर उस दिन मर जाये तो शहीद मरेगा

और जो शख्स शाम को यह अमल करे तो उसके लिए अल्लाह ताला सत्तर हज़ार फ़रिश्ते मुक़र्रर फ़रमा देगा

जो उस पर सुबह तक रेहमत भेजते रहेंगे और अगर उस रात मर जायेगा तो शहीद मरेगा।

-तिर्मिज़ी

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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