दिन के वक़्त ख्वाब और रात के वक़्त ख्वाब देखने में क्या फर्क है?

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Khawab ki Tabeer Din ke waqt Khawab dekhna
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दिन के वख्त ख्वाब देखना

अनस बिन मालिक रजि. से रियावत है, उन्होंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उम्मे हराम बिन्ते मिलहाल रजि. के यहां तशरीफ ले जाया करते थे।

और यह उबादा बिन सामित रजि. की बीवी थीं एक दिन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम उनके पास तशरीफ ले गये तो उन्होंने आपको खाना खिलाया।

इसके बाद आपकी जुऐं देखने लगीं, यहां तक कि आप सो गए।

फिर जब जागे तो आप हंस रहे थे। उम्मे हराम रजि. ने कहा, ऐ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम! आप किस वजह से हंसते हैं?

आपने फ़रमाया कि मेरी उम्मत के कुछ लोग मूझे अल्लाह की राह में लड़ते हुए दिखाई गए हैं

जो बादशाहों की तरफ समन्दर में सवार हैं या बादशाहों की तरफ तख्तियों पर बैठे हैं।

उम्मे हराम रजि. ने कहा, ऐ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम! दुआ फरमायें,

अल्लाह तआला मुझे भी उन लोगों में शरीफ करे।

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चुनांचे आपने उनके लिए दुआ फरमाई।

इसके बाद फिर सर रखकर सो गये।

फिर हंसते हुए जागे तो उम्मे हराम रजि. ने पूछा, ऐ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम! आप किस लिए हँसे है?

आपने फरमाया, मेरी उम्मत के कुछ लोग अल्लाह की राह में जिहाद करते हुए फिर मेरे सामने पेश किये गये, जैसा कि आपने पहले दफा फरमाया था।

उम्मे हराम रजि. कहती हैं, मैंने कहा, आप अल्लाह से दुआ करें कि मुझे कोई उन लोगों में से कर दे।

आपने फरमाया, तुम तो पहले लोगों में शरीफ हो चुकी हो।

फिर ऐसा हुआ कि उम्मे हराम रजि. अमीर मआविया के जमाने में समन्दर में सवार हुई और समन्दर से निकलते वख्त अपनी सवारी से गिरकर हलाक हो गयीं।

फायदे:

इमाम बखारी का मतलब यह है कि रात और दिन के ख्वाब बराबर है।

कुछ ने कहा कि सहर के वक्त ख्वाब ज्यादा सच्चा होता है।

इमाम इब्ने सिरीन का कौल इमाम बुखारी ने नकल किया है कि दिन का ख्वाब भी रात के ख्वाब की तरह है।

(मुख़्तसर सही बुखारी सफ़ा न० 1754)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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9 COMMENTS

  1. Sir mera naam mohammed nadeem hai, aur bera phuphu ka ladka hai ashfaq hum dono bachpan ke dost bhi hai, mere 3 bhai hain jo bade hai aur mere do ghar hai ek naya hai dusra purana hai aur oppsite me hi hai,sir ashfaq ne khwab dekha ki mei ne apne 3 bhai mese 2 bhai ko pura ne wale ghar me mardiya hai aur 1 ko naye wale ghar me mardiya hai aur ashfaq se khera hun ke ab muje sukun mila…..sir es khwab ka tabir kare mei pareshan hun jabse ye khwab sun hai…. Plz

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