जानिए बीमारी की हालत में नमाज़ कैसे अदा करें

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Bimari ki Halat mein Namaz Kaise padhen
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Bimari ki Halat mein Namaz Kaise padhen

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बीमार की नमाज़

नमाज़ एक ऐसा फ़र्ज़ है जो किसी भी हालत में मआफ़ नहीं। अगर कोई आदमी बीमार है तब भी उसे नमाज़ नहीं छोड़नी चाहिए। अगर वह खड़ा हो कर नमाज़ नही पढ़ सकता तौ बैठ कर पढ़े। और यदि बैठ कर भी न पढ़ सकता हो तो लैट कर नमाज़ अदा करे। और रुकूअ व सजदे इशारो से करें।

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लैट कर नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा यह है कि चित लैट कर पावं क़िबला कि तरफ कर ले। मगर पावं फैलाए नहीं। घुटने खड़े रखे ताकि क़िब्ले की तरफ़ पावं न हों। सर के निचे तकया रखले कि सर थोढ़ा ऊंचा हो जाए। और रुकूअ व सजदे के लिए सर झुका कर इशारा करे। दायीं करवट या बायीं करवट लैट कर चेहरा क़िबला की तरफ़ करके इशारे से रुकूअ व सज्दे किए जा सकते हैं। दायीं करवट पर लेटना बेहतर है। इशारे से सर झुकाना ज़रूरी है अगर बहुत ही ज़ियादा बीमार है सर नहीं झुक सकता तब आँख के इशारों से भी काम लिया जा सकता है।

(तर्किबे नमाज़, सफ़ा न० 85 )

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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