अलग-अलग सलाम के अलग-अलग फ़ज़ाइल जिसे जानना मुसलमान के लिए ज़रूरी है: आप भी जाने और दूसरों को भी शेयर करें

2
117
Jab kisi musalman se mulakat karen to yun salam kahen
Jab kisi musalman se mulakat karen to yun salam kahen
Islamic Palace App

Jab kisi musalman se mulakat karen to yun salam kahen

Jab kisi musalman se mulakat karen to yun salam kahen

जब किसी मुस्लमान से मुलाक़ात हो तो यों सलाम कहें

اَلسَلامُ عَلَيْكُم وَرَحْمَةُ اَللهِ
“अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह”
(as-salāmu ʿalaykum wa-raḥmatu llāh)

तर्जुमा – तुम पर सलामती हो और अल्लाह की रेहमत।

इसके जवाब में दूसरा मुस्लमान यों कहे

وَعَلَيْكُمُ اَلسَّلامُ وَرَحْمَةُ اَللهِ
व अलैकुमुसल्लामु व रेहमायुल्लाहि
(wa-ʿalaykumu s-salām wa-raḥmatu llāh)

तर्जुमा – और तुम पर (भी) सलामती और अल्लाह की रेहमत हो।

अगर लफ्ज़ ‘वररेहमतुल्लाह’ न बढ़ाया जाए तो सलाम और सलाम का जवाब ऐडा हो जाता है मगर जब लफ्ज़ बढ़ा दिए जाएं तो सवाब बढ़ जायेगा।

हमारा फेसबुक पेज लाइक करने के लिए यहाँ क्लिक करें…

एक बार एक शख्स रसूल अल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पास आया और उसने ‘अस्सलामु अलैकुम’ कहा हज़रात (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने उस का जवाब दिया और फ़रमाया, इसको दस निखियाँ (सवाब में) मिलीं। फिर दूसरा शख्स आया उसने अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि कहा। हज़रात (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने जवाब दिया और फ़रमाया, इस को बीस नेकियां मिलीं।

फिर एक शख्स आया और उसने ‘अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू’ कहा। प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने उसका जवाब देकर फ़रमाया इसको तीस नेकियां मिलीं। फिर चौथा शख्स आया, उसने कहा ‘अस्सलामु अलैकुम व रेहमुल्लाही व बरकातुहू व मग्फ़िरतुहू’ उसका जवाब देकर आपने इरशाद फ़रमाया कि इसको चालीस नेकियां मिलीं। फिर एक उसूल के तौर पर इरशाद फ़रमाया कि इसी तरह फ़ज़ाइल बढ़ते हैं।

-अबूदाऊद व मिश्कात

फायदा – सलाम करने वाला जिसने लफ्ज़ कहे काम से काम उसने लफ़्ज़ों में जवाब देना चाहिए और अगर उसके लफ़्ज़ों से ज़्यादा दुआ का इज़ाफ़ा कर दे तो यह बहुत हो बेहतर ही। अल्लाह तआला का इरशाद है-

‘फहय्यू बी अहस-न मिन्हा औ रुददूहा’

हमारा फेसबुक पेज लाइक करने के लिए यहाँ क्लिक करें…

अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

ISLAMIC PALACE को लाइक करने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया। जिन्होंने लाइक नहीं किया तो वह इसी तरह की दीन और इस्लाम से जुड़ी हर अहम बातों से रूबरू होने के लिए हमारे इस पेज Islamic Palace को ज़रूर लाइक करें, और ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को शेयर के ज़रिये पहुंचाए। शुक्रिया

2 COMMENTS

  1. Hello there! I know this is kinda off topic nevertheless I’d figured I’d
    ask. Would you be interested in trading links or maybe guest authoring
    a blog post or vice-versa? My site addresses a lot of the same topics
    as yours and I think we could greatly benefit from each other.
    If you happen to be interested feel free to send
    me an e-mail. I look forward to hearing from you! Awesome blog
    by the way!

  2. Write more, thats all I have to say. Literally, it seems as though you relied on the video to make your point.
    You obviously know what youre talking about, why throw away your intelligence on just posting videos to
    your blog when you could be giving us something informative to read?

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.