रेशमी कोट में नमाज़ पढ़ना और फिर उसे उतार देना कैसा है जानिए

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Reshmi Caot mein namaz padhna or fir use utar dena
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Reshmi Caot mein namaz padhna or fir use utar dena

रेशमी कोट में नमाज़ पढ़ना और फिर उसे उतार देना।

उक्बा बिन आमिर रज़ि. से रिवायत है उन्होंने फ़रमाया की नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की खिदमत में रेशमी कोट तोफफे के तौर पर लाया गया,

आपने उसे पहनकर नमाज़ पढ़ी, मगर जब नमाज़ से फारिग हुये तो उसे सख्ती से उतार फेंका।

गोया आपको वह सख्त नागवार गुजरा।

नीज आपने फरमाया कि अल्लाह से डरने वाले लोगों के लिए यह मुनासिब नहीं है।

फायदे

मुस्लिम कि रिवायत में है कि मुझे हजरत जिब्राईल अलैहि ने यह रेशमी कोट पहनने से रोक दिया था।

मुम्किन है कि आपने उसे रेशमी लिबास के हराम होने से पहले पहना हो

(मुख़्तार सहीह बुख़ारी, सफ़ा न० 202)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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