जुमा की नमाज़ जमात के साथ अदा करना हर मुसलमान पर लाज़िम है, मगर इन चार लोगों पर नहीं

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ALLAH subhaan wa taala ki Zaat wa Sifaat ka bayaan
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Ek farz ke bare mein juma ki namaz ada karna

Ek farz ke bare mein juma ki namaz ada karna

एक फ़र्ज़ के बारे में : जुमा की नमाज़ अदा करना

रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़र्माया :

“जुमा की नमाज़ जमात के साथ अदा करना हर मुस्लमान पर लाज़िम है, मगर चार लोगों पर (लाज़िम नहीं है)

  1. वह गुलाम जो किसी की मिल्कियत में हो
  2. औरत
  3. न बालिग बच्चा
  4. बीमार

(अबू दाऊद : 1067, अन तारिक बिन शिहाब रज़ि.)

फ़ायदा :

जहाँ जुमा के शराइत पाए जाते हों, तो वहाँ जुमा की नमाज़ अदा करना हर सही व तंदरुस्त,

आज़ाद और बालिग़ मुसलमान मर्द पर फ़र्ज़ है। लेकिन मुसाफिर पर फ़र्ज़ नहीं है।


(सिर्फ पांच मिनट का मदरसा : सफ़ा न० 735)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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