नमाज़ के दौरान छोटी बच्ची को गर्दन पर उठा लेना सही है या नहीं?

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Namaz ke dauran choti bachchi ko gardan par utha lena
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Namaz ke dauran choti bachchi ko gardan par utha lena

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नमाज़ के दौरान छोटी बच्ची को गर्दन पर उठा लेना।

अबू कतादा अन्सारी रज़ि से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि बसल्लम) उमामा रज़ि को उठाये हुये नमाज़ पढ़ लेते थे।

जो आपकी लख्ते जिगर जैनब रज़ि और अबुल आस बिन रबी बिन अब्दे शम्स की बेटी थी। जब सज्दा करते तो उसे उतार देते और जब खड़े होते तो उसे उठा लेते।

फायदे :

मालूम हुआ कि नमाज़ के दौरान बच्चे को उठाने से नमाज़ खत्म नहीं होती। नीज इस कद्र अमल कलील नमाज के मनाफी नहीं है।

(औनुलबरी, 1/609)

(मुख्तसर सही बुखारी, सफ़ा न० 257)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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