जिस शख़्स में शर्म नहीं वह जानवर है

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Jis Shakhs mein sharm nahi veh janwar hai
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Jis Shakhs mein sharm nahi veh janwar hai

Jis Shakhs mein sharm nahi veh janwar hai

जिस शख़्स में शर्म नहीं वह जानवर है

इरशाद फ़रमाया रसूल-ए-ख़ुदा (स०) ने कि-

पहले नबियों के कलाम से लोगों को जो बातें मालूम हुई हैं उनमें एक बात यह भी है कि जब तुझको शर्म न रहे, न ख़ुदा से, न लोगों से, फिर तू जानवर है, जो तेरे दिल में आवे वह कर ।

(बुख़ारी शरीफ़)

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इस हदीस शरीफ़ का मतलब यह है कि-

शर्म व हया अम्बिया (अ० स०) के दिन में पसन्द है। क्योंकि आदमी की तबियत बुरे कामो के करने को चाहती है मगर शर्म की वजह से रुक जाया है। जब शर्म उड़ गयी तो आदमी, आदमी न रहा, जानवर हो गया। फिर जो चाहे करे। इज़्ज़त और शराफ़त उसकी लूट गयी। ईमान में उसके फ़र्क आ गया।

(बाग़े-जन्नत यानि ख़ुदाई बाग़, सफा न० 326)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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