अपने दीन कि खातिर गुनाहों से अलग हो जाने वाले कि फजीलत।

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Apne deen ki khatir gunahon se alag ho jane wale ki fazilat
makkah
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Apne deen ki khatir gunahon se alag ho jane wale ki fazilat

अपने दीन कि खातिर गुनाहों से अलग हो जाने वाले कि फजीलत।

नोमान बिन बशीर रज़ि. से रिवायत है, उन्होंने कहा कि मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से सुना, आप फरमा रहे थे कि हलाल जाहिर है और हराम (भी) जाहिर है और इन दोनों के बीच कुछ शक और शुबा कि चीजें हैं, जिन्हें ज्यादातर लोग नहीं जानते, बस जो आदमी इन शक और शुबा से बच गया, उसने अपने दीन और अपनी इज्जत को बचा लिया और जो कोई इन शक और शुबा वाली चीज़ों में पड़ गया,

उसकी मिसाल उस जानवर चराने वाले कि सी है, जो बादशाह कि चरागाह के आस पस (अपने जानवरों को) चराये, करीब है कि चरागाह कि अन्दर उसका (जानवर) घुस जाये। आगाह रहो कि हर बादशाह की एक चरागाह होती है, खबरदार! अल्लाह की चरागाह उसकी जमीन में हराम की हुई चीजें हैं। सुन लो! बदन में एक टुकड़ा (गोश्त का) है, जब वह ठीक रहता है तो सारा बदन ठीक रहता है और जब वह बिगड़ जाता है तो सारा बदन ख़राब हो जाता है। आगाह रहो, वह टुकड़ा दिल है।

फायदे: इमाम बुखारी ने इस हदीस से यह भी साबित किया है कि शक और शुबा कि चीजों से परहेज करना (बचना) तकवा कि निशानी है (अलबुयू 2051)।

शक और शुबा से मुराद वह मुश्किल मामलता हैं कि उन पर यकीनी तौर पर कोई हुक्म न लगाया जा सकता हो, अगरचे इल्म वाले किसी हद तक उनसे बाखबर होते हैं फिर भी शकों से खाली नहीं होते।

 

(औनुलबारी 1/174)

(मुख्तसर सही बुखारी, सफ़ा न० 51 )

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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