हुज़ूर ﷺ का मुअजिज़ा : घी में बरकत

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Huzur ka Mojza-Ghee mein barkat
Madina
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Huzur ka Mojza-Ghee mein barkat

हुज़ूर ﷺ का मुअजिज़ा : घी में बरकत

हज़रत हमज़ह बिन उम्र अस्लमी रज़ि. फरमाते हैं के

गज़व-ए-तबूक के सफर में घी की मशक की ज़िम्मेदारी मेरी थी।

दौरान सफ़र मैं ने उस में से थोड़ा सा घी निकला

और हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के लिए खाना तय्यार किया

और मशक में देखा तो घी बहुत ही कम बचा था।

मैं ने वह मश्क धुप में रख दी और मैं सो गया, अचानक मैं ने घी के बहने की आवाज़ सुनी,

तो मेरी आँख खुल गई, देखा तो घी बह रहा था।

मैं जल्दी से खड़ा हुआ और मशक का मुँह पकड़ लिया

हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़र्माया :

“अगर उस को छोड़ देते तो पूरी वादी घी से बहने लगती।”

(दलाइलुन्नुबुव्वह लिल असफहानी : 334, अन हमज़ह बिन अम्र अस्लमी रज़ि.)

(सिर्फ पांच मिनट का मदरसा : सफ़ा न० 725)

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