इल्म हासिल करने के लिए बारी बांधना।

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Ilm hasil karne ke liye bari bandhna
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Ilm hasil karne ke liye bari bandhna

इल्म हासिल करने के लिए बारी बांधना।

उमर बिन खत्ताब रज़ि. से रिवायत है,

उन्होंने फरमाया कि मैं और मेरा एक अन्सारी पडोसी बनू उम्मया बिन जैद के गांव में रहा करते थे

जो मदीना कि बुलन्दी कि तरफ था

और हम (रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की खिदमत  में  बारी-बारी आते थे।

एक दीन वह आता और दीन मैं। जिस दीन मैं आता था,

उस रोज की वह्य वगैरह का हाल मैं उसको बता देता था

और जिस दीन वह आता, वह भी ऐसा, ही करता था। एक दिन ऐसा ही करता था।

एक दिन ऐसा हुआ कि मेरा अन्सारी दोस्त जब वापस आया

तो उसने मेरे दरवाज़े पर जोर से दस्तक दी कहने लगा कि वह (उमर) यहां है?

मैं घबराकर बाहर निकल आया तो वह बोला: आज एक बहुत बड़ा हादसा हुआ।

(रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपनी बीवियों को तलाक दे दी है) उमर रज़ि कहते हैं

कि में हफ्सा रज़ि के पास गया तो वह रो रही थीं। मैंने कहा रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने तुम्हें तलाक दे दी है?

वह बोलीं मुझे इल्म नहीं है। फिर में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के पास हाज़िर हुआ

और खड़े खड़े अर्ज़ किया कि क्या अपने अपनी बीवियों को तलाक दे दी है?

अपने फ़रमाया , ”नहीं” तो मैंने (मारे ख़ुशी के) अल्लाहु अकबर कहा।

फायदे :

मालूम हुआ कि अगर पड़ोसियों को तकलीफ न हो तो छत पर बालाखाना बनाने में कोई अर्ज नहीं (आलमज़ालिम 2468)। नीज

(मुख्तसर सही बुखारी सफ़ा न०76)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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