इल्म पूछने में शर्म करना कैसा है जानिए नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने क्या फरमाया

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Ilm puchne mein sharm karna
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Ilm puchne mein sharm karna

इल्म पूछने में शर्म करना

उम्मे सलाम रज़ि. से रिवायत है कि

उम्मे सुलैम रज़ि. रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आयीं

और मालूम किया कि ए अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम!)

अल्लाह तआला हक बात बयान करने से नहीं शरमाता,

क्या औरत को एहतिलाम (वीर्य पतन) हो तो उसे नहान चाहिए।

नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया हाँ!

अपने कपड़े पर पानी देखें। उम्मे सलमा रज़ि. ने (शर्म से) अपना मुंह छिपा लिया

और अर्ज किया ऐ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम!

क्या औरत को भी एहतिमाम होता है?

आपने फरमाया, हाँ तेरा हाथ खाक आलूद हो, फिर बच्चे की सूरत माँ से क्यों मिलती?

फायदा:

अगर किसी को कोई मसला पेश आ जायें तो उसे जानने वालों से मालूम करना चाहिए, शर्म और ह्या से काम न लिया जाये।

(औनुलबारी 1/285)

(मुख्तसर सही बुखारी सफ़ा न० 100)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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