नमाजी को जब तक अपने बेवुजू होने का यकीन न हो जाये तो क्या वुजू करना जरुरी है

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Shak se wuzu na karen yaha tak ki hawa nikalne ka yakin na ho jaye
Wuzu
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Shak se wuzu na karen yaha tak ki hawa nikalne ka yakin na ho jaye

शक से वुजू न करे यहां तक कि (हवा निकलने का) यकीन न हो जाये।

अब्दुल्लाह बिन यजीद अनसारी से रिवायत है,

उन्होंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने एक आदमी का हाल बयान किया,

जिसको यह ख्याल हो जाता था कि नमाज में वो कोई चीज (हवा का निकलना) महसूस कर रहा है,

आपने फरमाया वो नमाज से उस वक्त न फिरे जब तक हवा निकलने कि आवाज या बू न पाये।

फायदे:

मकसद यह है कि नमाजी को जब तक अपने बेवुजू होने का यकीन न हो जाये,

नमाज को न छोड़े, इस हदीस से यह बात भी मालूम हुई कि कोई यकीनी मामला सिर्फ शक कि वजह से मशकूक नहीं होता

और किसी चीज को बिला वजह शक और शुबा कि नजर से देखना जाइज नहीं।

(अलबुयू: 2056)

(मुख़्तसर सही बुखारी, सफ़ा न० 105)

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