शर्म की बिना पर दूसरों के जरिये मसला पूछना कैसा है

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Sharm ke bina par dusron ke zariye masla puchna
Dua
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Sharm ke bina par dusron ke zariye masla puchna

शर्म की बिना पर दूसरों के जरिये मसला पूछना।

अली रज़ि. से रिवायत है के उन्होंने फ़रमाया

कि मेरी मजी बहुत निकला करती थी,

मैंने मिकदाद रज़ि. से कहा कि वह नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से इसका हुक्म पूछें।

चुनांचे उन्होंने मालूम किया तो अपने फरमाया कि मजी के लिए वजू करना चाहिए।

फायदे:

दूसरी रिवायत में है कि हज़रत अली रज़ि. खुद रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कि बेटी आपके निकाह में थी,

इसलिए शर्म रोकती थी और ऐसी शर्म में कोई बुराई नहीं।

कुछ रिवायतों से मालूम होता है कि हजरत अली रजी. की मौजूदगी में यह सवाल पूछा गया।

(औनुलबारी 1/285)

(मुख्तसर सही बुखारी सफ़ा न० 101)

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