जानिए तलाक़ माँगने का अज़ाब और, महर माफ़ करने का क्या सवाब है

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Saari Halaal Cheezo Me Allah Ta’ala Ke Nazdiq Sabse Napasan’dida Cheez
Talaq
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Talaq mangne ka azab or meher maaf karne ka sawab

तलाक़ माँगने का अज़ाब, महर माफ़ करने का सवाब

रहमते आलम हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) फ़रमाते हैं कि-

जो औरत अपनी ख़ुशी से अपना महर माफ़ कर देती है,

अल्लाहतआला उससे खुश होता है और मैं उसकी शिफ़ाअत करूँगा

और वह जन्नत में जायेगी। और जिस औरत का मर्द ग़रीब हो

और वह औरत अपने माल से एक दिरहम भी उस पर ख़र्च करेगी तो

उसको सात हज़ार दिरहम अल्लाह की राह में ख़र्च करने का सवाब मिलेगा।

इस तरह समझो कि अगर कोई औरत अपने ग़रीब शौहर पर अपने माल से एक रुपया ख़र्च करे

तो उसको सात हज़ार रूपये ख़र्च करने का सवाब मिलेगा

और जब कोई बीवी अपने घर में झाड़ू देती है

तो उसको काबे शरीफ़ में झाड़ू देने के बराबर सवाब मिलता है, और-

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इरशाद फ़रमाया-

हुज़ूर (सलल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने कि जो औरत बिला सख़्त मजबूरी के तलाक़ माँगे,

उस पर जन्नत की खुशबु हराम है।

और औरतों को बिला सख़्त मजबूरी के तलाक़ न दी जाये।

क्योंकि अल्लातआला ऐसे मर्दों और औरतों को पसन्द नहीं करता जो बहुत से मज़े चखने वाले हों।

फायदा

सख़्त मजबूरी यह है कि औरत बदकार हो जाये या कोई

और ऐसी बात हो जाये कि जिसकी वजह से इत्तफ़ाक़

और निबाह न हो सके तो तलाक़ देना बहुत अच्छा है।

बिला सख़्त मजबूरी के तलाक़ देने से अर्श भी काँप जाता है।

(बाग़े-जन्नत यानी ख़ुदाई बाग़, सफ़ा न० 129)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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