एक अहेम अमल की फ़ज़ीलत रात में सूर-ए-दुखाना पढ़ना

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Ek eham amal ki fazilat raat mein Sur-Ae-dukhna padhna
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Ek eham amal ki fazilat raat mein Sur-Ae-dukhna padhna

एक अहेम अमल की फ़ज़ीलत रात में सूर-ए-दुखाना पढ़ना

रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़र्माया:

जिस शख्स ने रात में “हामैं अद दुखाना” (यानी सूर-ए-दुखाना) पढ़ी,

उस के लिए सत्तर हज़ार फ़रिश्ते इस्तिग़फ़ार करते हैं

के जिसने जुमा की रात में सूर-ए-दुखाना पढ़ी उस के तमाम गुनाह माफ़ कर दिये जाते हैं।”

(तिर्मिज़ी: 2888-2881, अन अबी हुरैरह रज़ि.)

(सिर्फ पांच मिनट का मदरसा, सफ़ा न० 712)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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