एक सुन्नत के बारे में दुआ के कलिमात को तीन बार कहना

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Jab Khuwab Dekhen ki wo ek cheez ko
makkah
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Ek sunnat ke bare mein dua ke kalimat ko teen baar kehna

एक सुन्नत के बारे में दुआ के कलिमात को तीन बार कहना

रसूलुल्लाह(सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) दुआ व इस्तिगफार के कलिमात को तीन तीन मर्तबा दोहराना पसंद फ़र्माते थे।

(अबू दाऊद: 1524, अन बराअ बिन आज़िब रज़ि.)

(सिर्फ पांच मिनट का मदरसा, सफ़ा न० 712)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)

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