जानिए इशराक़ की नमाज़ पढ़ने का कितना सवाब है?

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Regarding a duty Be allegiance to the Ameer
Quran
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Ishrak ki namaz padhne ka sawab

इशराक़ की नमाज़ पढ़ने का सवाब

इशराक़ की नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा यह है कि

सुबह की नमाज़ जमाअत के साथ पढ़कर उसी जगह बैठा हुआ अल्लाह की याद करता रहे।

जैसे कलमा या दुरुद शरीफ़ या कुरआन-ए-पाक या कोई और वज़ीफ़ा पढ़ता रहे

और दुनिया की बातचीत न करे और जब सूरज निकल आये तो

दो रकअत या चार रकअत नफ़िल पढ़े तो एक हज और उमरा करने का सवाब मिलेगा।

फ़ायदा-

अगर कभी जमाअत न मिले और किसी ज़रूरत की वजह से बैठ भी न सके

तो फ़िर भी यह नमाज़ पढ़े तो भी सवाब मिलेगा।

जो औरत अपने घर में इस नामज को पढ़े उसके लिए भी यही सवाब है।

(बाग़े-जन्नत यानी ख़ुदाई बाग़, सफ़ा न० 249)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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