जानना चाहिए कि पाँच बातें दिन-ए-इस्लाम की जड़ हैं और फ़र्ज़ हैं

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Namaz padhne ka sawab
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Namaz padhne ka sawab

नमाज़ पढ़ने का सवाब

जानना चाहिए कि पाँच बातें दिन-ए-इस्लाम की जड़ हैं और फ़र्ज़ हैं

1. ईमान लाना, 2 .नमाज़ पड़ना, 3. रमज़ान शरीफ के रोज़े रखना, 4. हज करना, 5.ज़कात देना।

इनका छोड़ने वाला फ़ासिक़ और सख्त मुजरिम

और सज़ा का मुस्तहक़ है और इनकार करने वाला काफ़िर

और बाग़ी और बेईमान है। अल्लाह व रसूल ने नमाज़ पढ़ने की बहुत ताकीद फ़रमाइयी है।

रसूल-ए-पाक (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) फरमाते हैं कि-

बेशक अल्लाहतआला ने हर मुसलमान मर्द

और औरत पर पाँच वक़्त की नमाज़ फ़र्ज़ कर दी हैं|

बस जो कोई पाँच वक़्त की नमाज़ हमेशा पढ़ता रहेगा,

अल्लाहतआला उस पर दोज़ख़ की आग हराम कर देता है।

बेशक नमाज़ दीन का सतून है।

जिसने नमाज़ को अच्छी तरह पढ़ा, उसने दीन को क़ायम रखा

और जिसने नमाज़ न पढ़ी उसने दीन को गिरा दिया और अपना दीन बर्बाद कर दिया।

और नमाज़ पढ़ने वाले मर्द और औरतें क़यामत के रोज़ नबियों, वालियों और शहीदों के साथ जन्नत में दाख़िल होंगे

बेनमाज़ी फ़िरऔन, हामान, क़ारून, नमरूद

और अबीबिन ख़लफ़ वग़ैरा इन बड़े-बड़े काफ़िरों के साथ दोज़ख़ में जायेंगे।

खुदा की पनाह! नमाज़ न पढ़ना किस क़दर संगीन जुर्म है कि

नमाज़ न पढ़ने वाला अमल में काफ़िरों के बराबर समझा गया और काफ़िरों के साथ दोज़ख़ में रहेगा।

(बाग़े-जन्नत यानी ख़ुदाई बाग़, सफ़ा न० 233)

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अल्लाह तआला रब्बुल अज़ीम हम सब मुसलमान भाइयों को कहने, सुनने और सिर्फ पढ़ने से ज्यादा अमल करने की तौफीक अता फ़रमाये और हमारे रसूल  नबी ए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई सुन्नतों और उनके बताये हुए रास्ते पर हम सबको चलने की तौफीक अता फ़रमाये (आमीन)।

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